भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस के रिश्ते दुनिया के सबसे मजबूत बड़े रिश्तों में से एक हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हाल की दो दिन की भारत यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दी है। जयशंकर के अनुसार इस दौरे में वे काम पूरे हुए जो पहले पीछे रह गए थे, खासकर आर्थिक सहयोग का हिस्सा। जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस के बीच रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में संबंध हमेशा मजबूत रहे हैं, लेकिन आर्थिक संबंध उतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ पाए। इस बार की मुलाकात में दोनों देशों ने इस कमी को पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि बाकी देशों की तरह भारत के अमेरिका और यूरोप से आर्थिक संबंध बढ़े, लेकिन रक्षा क्षेत्र उतना नहीं बढ़ा। वहीं रूस के साथ उल्टा हुआ—रक्षा मजबूत रहा, पर कारोबार पीछे रहा।
विदेश मंत्री ने 78 साल पुराने भरोसेमंद रिश्तों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले 78 साल में दुनिया में बहुत बदलाव आया, लेकिन भारत–रूस के रिश्ते स्थिर रहे। रूस के चीन, अमेरिका और यूरोप से कभी रिश्ते ऊपर तो कभी नीचे हुए, लेकिन भारत के साथ भरोसा मजबूत रहा। उन्होंने कहा कि भारत में रूस को लेकर आम लोगों के मन में एक अपनापन है, जो दुनिया में कम दिखाई देता है।
पुतिन के दौरे में कई अहम समझौते हुए। पहला– एक बड़ा मोबिलिटी समझौता, जिससे अब भारतीय नागरिकों को रूस में काम करने के ज्यादा मौके मिलेंगे। दूसरा– खाद सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला, जिसमें उर्वरक के लिए दोनों देश मिलकर संयुक्त प्रोजेक्ट बनाएंगे। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उर्वरक आयात करने वाला देश है, इसलिए यह समझौता बेहद अहम है।
भारत और रूस ने तय किया कि दोनों देश मिलकर शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में नई साझेदारी बढ़ाएंगे। इसमें छात्र आदान-प्रदान, संयुक्त डिग्री कार्यक्रम, रिसर्च प्रोजेक्ट और बड़े अंतरराष्ट्रीय सेमिनार शामिल होंगे। दोनों देश उर्वरक और कृषि क्षेत्र में भी लंबे समय के समझौते आगे बढ़ाएंगे।
जयशंकर ने कहा कि भारत किसी के दबाव में नहीं चलता और अपनी विदेश नीति खुद तय करता है। उन्होंने कहा कि पुतिन का दौरा किसी देश को संदेश देने के लिए नहीं था, बल्कि दिल्ली और मॉस्को के बीच रिश्ते मजबूत करने के लिए था। उन्होंने कहा कि भारत का मकसद है कि दुनिया के हर बड़े देश से अच्छे संबंध बनाए रखें और आगे बढ़ें।

