नेपाल सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्रियों शेर बहादुर देउबा, पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ और पूर्व मंत्री दीपक खड़का के खिलाफ औपचारिक जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई दो सप्ताह पहले उनके आवासों से जले हुए करेंसी नोटों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 9 सितंबर को ‘जेन-जी’ प्रदर्शनकारियों ने नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष देउबा, पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड और पूर्व ऊर्जा मंत्री खड़का के घरों में आग लगा दी थी। ऑनलाइन वायरल हुए वीडियो में प्रदर्शनकारियों को उनके घरों में घुसकर तोड़फोड़ करते हुए और 500 तथा 1,000 रुपये के हजारों नोटों को जलाते हुए देखा गया था।
मामला गरमाने के बाद, सरकार ने तुरंत मनी लॉन्ड्रिंग जांच विभाग की एक टीम को साक्ष्य जुटाने के लिए तीनों नेताओं के आवासों पर भेजा। अधिकारियों के मुताबिक, विभाग की टीम ने 21 सितंबर को देउबा और खड़का के घरों से और 23 सितंबर को प्रचंड के घर से जली हुई करेंसी और राख सहित अन्य सबूत एकत्र किए। इन नमूनों को आगे की जांच के लिए राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया है, जिसके साथ ही औपचारिक जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पिछले दो दशकों से सत्ता में रहे देउबा और प्रचंड ने अपने कार्यकाल के दौरान अवैध रूप से संपत्तियां अर्जित की हैं, जिसके चलते यह जांच महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, देउबा के कार्यालय ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। देउबा के कार्यालय ने बयान जारी कर दावा किया है कि वायरल हुए वीडियो एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से बनाए गए हैं और इनका एकमात्र उद्देश्य उनकी छवि को खराब करना है।

