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Monday, December 1, 2025

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मणिपुर में जनजातीय नेताओं से मिले मोहन भागवत: कहा—आरएसएस किसी के खिलाफ नहीं, समाज को जोड़ने के लिए है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को मणिपुर की राजधानी इंफाल में जनजातीय नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। तीन दिवसीय मणिपुर दौरे के दूसरे दिन उन्होंने सामाजिक एकता पर जोर दिया और कहा कि संघ समाज को सशक्त बनाने के लिए समर्पित संस्था है, जो किसी के खिलाफ काम नहीं करती।

भागवत ने कहा, “आरएसएस किसी को नष्ट करने के लिए नहीं बना है। यह समाज को पूर्ण बनाने के लिए गठित हुआ है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ न राजनीति करता है और न ही किसी संगठन को दूर से नियंत्रित करता है। उनके अनुसार, आरएसएस केवल मित्रता, स्नेह और सामाजिक सौहार्द के आधार पर समाज के बीच कार्य करता है।

भारत की सभ्यता की निरंतरता पर बल देते हुए उन्होंने कहा, “हम साझा चेतना के कारण एक हैं। विविधता के बावजूद हम एक ही सभ्यतागत परिवार के सदस्य हैं। एकता के लिए समानता आवश्यक नहीं होती।” उन्होंने बताया कि आरएसएस की स्थापना बाहरी परिस्थितियों के कारण नहीं, बल्कि समाज के भीतर मौजूद विघटन को दूर करने के उद्देश्य से डॉ. केबी हेडगेवार ने की थी।

भागवत ने कहा कि “आरएसएस मनुष्य निर्माण और चरित्र निर्माण का आंदोलन है।” उन्होंने जनजातीय नेताओं को संघ की शाखाओं में जाकर जमीनी कार्यप्रणाली को देखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता और समाज की भलाई के लिए काम करने वाला हर व्यक्ति, चाहे वह संघ में औपचारिक रूप से हो या न हो, अघोषित स्वयंसेवक माना जा सकता है।

बैठक में जनजातीय नेताओं द्वारा उठाए गए सवालों के भी भागवत ने जवाब दिए। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चिंताएं हैं। उन्होंने आत्मनिर्भरता और संविधान के दायरे में समाधान खोजने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “परिवार के मुद्दे परिवार के भीतर ही सुलझने चाहिए। बातचीत एकत्व की भावना से होनी चाहिए, न कि सौदेबाजी की तरह।”

भागवत ने जनजातीय समुदायों से अपनी भाषाओं, लिपियों और परंपराओं पर गर्व करने और स्वदेशी जीवनशैली अपनाने की अपील की। युवा नेताओं के साथ अलग बैठक में उन्होंने कहा कि भारत कोई नया राष्ट्र नहीं, बल्कि एक प्राचीन और निरंतर सभ्यता है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि आरएसएस शाखाएं जिम्मेदार, सक्षम और निस्वार्थ नागरिकों का निर्माण करती हैं, जो अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य समाज एवं राष्ट्र के हित में लगाते हैं।

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