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Monday, December 1, 2025

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विय्यूर हाई-सिक्योरिटी जेल में आरोपी पर कथित यातना का मामला गहराया, अदालत ने मांगी विस्तृत जांच

केरल की विय्यूर हाई-सिक्योरिटी जेल में हिरासत के दौरान एक आरोपी पर कथित रूप से की गई यातना के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। कोच्चि स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने सोमवार को त्रिशूर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) को आरोपी की शिकायत पर आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया। अदालत ने जेल अधिकारियों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को असंतोषजनक पाया और कहा कि पूरे मामले की गहराई से जांच की आवश्यकता है।

यह मामला माओवादी केस के आरोपी मनोज से जुड़ा है, जिसने आरोप लगाया था कि 13 नवंबर को विय्यूर जेल में अधिकारियों ने उसके साथ बर्बरतापूर्ण मारपीट की थी। घटना के बाद मनोज को तिरुवनंतपुरम स्थित पूजापुरम सेंट्रल जेल स्थानांतरित कर दिया गया। एनआईए विशेष अदालत के जज पी. के. मोहनदास ने रिकॉर्ड देखने के बाद माना कि जेल प्रशासन की तरफ से दिया गया स्पष्टीकरण वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाता।

स्पष्टीकरण पर अदालत के सवाल
विय्यूर हाई-सिक्योरिटी जेल के अधीक्षक की ओर से दिए गए बयान में कहा गया कि मनोज को कोई गंभीर चोट नहीं थी और उसे किसी बड़े इलाज की आवश्यकता नहीं थी। लेकिन अदालत ने रिकॉर्ड का हवाला दिया कि उसी दिन शाम को जेल के कुछ कर्मचारियों का मेडिकल कॉलेज, त्रिशूर में इलाज हुआ था। इसके बावजूद घायल आरोपी को चिकित्सा न देकर लगभग 300 किलोमीटर दूर दूसरी जेल भेज दिया गया। अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही और संदिग्ध प्रक्रिया बताया।

सीसीटीवी की खराब हालत पर अदालत सख्त
अदालत ने जेल के सीसीटीवी सिस्टम की खराब स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। एक पीडब्ल्यूडी असिस्टेंट इंजीनियर ने बताया कि जेल में लगे 165 कैमरों में से केवल 9 कैमरे कार्यशील हैं, और उनमें से सिर्फ एक कैमरा ही रिकॉर्डिंग कर रहा है। हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था का इस स्तर पर विफल होना अदालत ने अत्यंत गंभीर सुरक्षा खतरा बताया और इंजीनियरों को तुरंत सिस्टम सुधारने का आदेश दिया। साथ ही उन्हें निश्चित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट जमा करने को कहा गया।

अदालत ने दस्तावेज सीजेएम को भेजे
अदालत ने मनोज की लिखित शिकायत, मेडिकल रिकॉर्ड और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट का अध्ययन किया। रिपोर्ट में बताया गया कि मनोज को गंभीर चोटें आई थीं। इसी आधार पर अदालत ने आदेश दिया कि पूरा मामला त्रिशूर सीजेएम को भेजा जाए ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सके। साथ ही मनोज की मेडिकल जांच एर्नाकुलम जनरल हॉस्पिटल में कराने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया गया।

विय्यूर जेल में वापस भेजने का अनुरोध खारिज
मनोज ने अदालत से आग्रह किया था कि उसे वापस विय्यूर हाई-सिक्योरिटी जेल भेजा जाए, लेकिन अदालत ने यह मांग खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि वहां सीसीटीवी सिस्टम सही ढंग से नहीं चल रहा, इसलिए उसकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। अदालत ने मनोज को थवनूर सेंट्रल जेल में शिफ्ट करने का आदेश दिया, जहाँ निगरानी प्रणाली बेहतर तरीके से काम कर रही है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला बेहद संवेदनशील है और आरोपी की सुरक्षा, जेल प्रशासन की जिम्मेदारी और मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को देखते हुए आगे की कार्रवाई अनिवार्य है।

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