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Sunday, December 4, 2022

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भारत पत्रकारों के लिए एशिया का सबसे खतरनाक देश, पाक-अफगानिस्तान को छोड़ा पीछे ! —————–धर्मेन्द्र शर्मा

भारत में मीडियाकर्मी कितने असुरक्षित हैं इस बात का अंदाजा विश्व की एक प्रमुख मीडिया की निगरानी करने वाली संस्था की रिपोर्ट से लगाया जा सकता है, जिसमें भारत को मीडियाकर्मियों के लिए एशिया का सबसे खतरनाक देश करार दिया गया है। रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स ने अपनी वाषिर्क रिपोर्ट में कहा है कि साल 2015 में दुनिया भर में कुल 110 पत्रकार मारे गए हैं, जिनमें नौ भारतीय पत्रकार शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इस साल जिन 9 पत्रकारों की हत्या हुई, उनमें से कुछ पत्रकार संगठित अपराध व इसके नेताओं से संबंध पर रिपोर्टिंग कर रहे थे। वहीं कुछ पत्रकारों ने अवैध खनन की रिपोर्टिंग के चलते अपनी जान गवांई। भारत में अपनी ड्यूटी करने के दौरान 5 पत्रकार मारे गए, जबकि 4 अन्य के मरने के कारणों का पता नहीं चला है। रिपोर्ट पर गौर फरमाएं तो, पत्रकारों की मौत इस बात की पुष्टि करती है कि भारत मीडियाकर्मियों के लिए एशिया का सबसे घातक देश है जिसका नंबर पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों से पहले आता है। रिपोर्ट ने भारत सरकार से पत्रकारों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय योजना लागू करने का आग्रह किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया में युद्ध से जूझ रहे अशांत देशों की तुलना में शांति प्रिय माने जाने वाले देशों में इस साल दोगुने पत्रकार मारे गए हैं। पिछले साल ये आंकड़े बिल्कुल उलट थे, 2014 में युद्धग्रस्त देशों में दो तिहाई पत्रकारों की हत्या हुई थी। इस साल दुनिया भर में पत्रकारों की कुल हत्याओं में सिर्फ 36 फीसदी युद्धग्रस्त क्षेत्रों में हुई। जबकि 64 फीसदी हत्याएं आम तौर पर शांत माने जाने वाले देशों में हुई, जिनमें भारत का नाम भी शामिल है। इस वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया में 110 पत्रकारों में से 67 पत्रकार अपनी ड्यूटी करते हुए मारे गए, जबकि 43 के मरने की परिस्थिति साफ नहीं है। इसके अलावा 27 गैर-पेशेवर सिटीजन जर्नलिस्ट और सात अन्य मीडियाकर्मी भी मारे गए हैं। रिपोर्ट कहती है कि ज्यादातर पत्रकारों की हत्या उनके खिलाफ जानबूझकर की गई हिंसा का नतीजा थी और यह मीडियाकर्मियों की रक्षा की पहलों की विफलता हो दर्शाता है। रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र से कार्रवाई करने का आह्वान किया गया है। पेरिस स्थित इस संस्था ने कहा कि इस आपात स्थिति से निपटने के लिए एक तंत्र की जरूरत है। पत्रकारों की सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के एक विशेष प्रतिनिधि की तुरंत नियुक्ति होनी चाहिए। संस्था ने कहा कि सन 2005 से 787 पत्रकारों में से 67 की हत्या की गई। जानकारी के मुताबिक उनके काम करने के दौरान उन्हें निशाना बनाया गया। आरएसएफ की रिपोर्ट कहती है कि युद्ध ग्रस्त इराक और सीरिया इस साल पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक जगह है। इराक में 11 और सीरिया में 10 पत्रकार मारे गए हैं। सूची में तीसरा नंबर फ्रांस का है जहां जनवरी में जिहादी हमले में आठ पत्रकार मारे गए थे। यह हमला व्यंग पत्रिका शार्ली ऐब्दो के दफ्तर पर हुआ था जिसने दुनिया को सदमे में डाल दिया था। बांग्लादेश में, 4 धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगरों की हत्या की गई, जिसकी जिम्मेदारी स्थानीय जिहादियों ने ली।
 

जिन पत्रकारों की हत्या हुयी-

भारत में 1992 से अब तक हजारों पत्रकारों पर जानलेवा हमले किये गये जिनमे 44 पत्रकारों की निर्मम हत्या कर दी गई।

1- संदीप कोठारी, फ्रीलांस,जबलपुर, मध्य प्रदेश, 21 जून 2015,

2- जगेन्द्र सिंह, फ्रीलांस, उत्तर प्रदेश, शाहजहांपुर, 8 जून 2015,

3- MVN शंकर, आंध्र प्रभा, आंध्र प्रदेश, भारत में 26 नवंबर 2014,

4- तरुण कुमार आचार्य, कनक टीवी, सम्बाद ओडिशा, 27 मई 2014,

5- साई रेड्डी, देशबंधु, बीजापुर जिले, भारत में 6 दिसम्बर 2013,

6- नरेंद्र दाबोलकर, साधना, पुणे, 20 अगस्त 2013,

7- राजेश मिश्रा, मीडिया राज, रीवा, मध्य प्रदेश, 1 मार्च 2012

8- साई रेड्डी, देशबंधु, बीजापुर जिले, 6 दिसम्बर 2013

9- राजेश वर्मा, आईबीएन 7, मुजफ्फरनगर, 7 सितंबर 2013,

10- द्विजमणि सिंह, प्रधानमंत्री समाचार, इम्फाल, 23 दिसम्बर 2012,

11- विजय प्रताप सिंह, इंडियन एक्सप्रेस, इलाहाबाद, 20 जुलाई 2010,

12- विकास रंजन, हिंदुस्तान, रोसेरा, नवंबर 25, 2008

13- जावेद अहमद मीर, चैनल 9, श्रीनगर, 13 अगस्त 2008,

14- अशोक सोढ़ी, डेली एक्सेलसियर, सांबा, 11 मई 2008,

15- मोहम्मद मुसलिमुद्दीन, असोमिया प्रतिदिन, बारपुखरी, 1 अप्रैल, 2008

16- प्रहलाद गोआला, असोमिया खबर, गोलाघाट, 6 जनवरी 2006,

17- आसिया जीलानी, स्वतंत्र, कश्मीर, भारत में 20 अप्रैल 2004,

18- वीरबोइना यादगिरी, आंध्र प्रभा, मेडक, भारत में 21 फ़रवरी 2004,

19- परवेज मोहम्मद सुल्तान, समाचार और फीचर एलायंस, श्रीनगर, 31 जनवरी 2003,

20- राम चंदर छत्रपति, पूरा सच, सिरसा, 21 नवंबर 2002,

21- मूलचंद यादव, फ्रीलांस, झांसी, 30 जुलाई 2001,

22- प्रदीप भाटिया, हिंदुस्तान टाइम्स, श्रीनगर, 10 अगस्त 2000,

23- एस गंगाधर राजू, इनाडू, टेलीविजन (ई टी वी), हैदराबाद, 19 नवंबर 1997

24- एस कृष्णा, इनाडू टेलीविजन (ई टी वी), हैदराबाद, 19 नवंबर 1997,

25- जी राजा शेखर, इनाडू टेलीविजन (ई टी वी), हैदराबाद, 19 नवंबर 1997,

26- जगदीश बाबू, इनाडू टेलीविजन (ई टी वी), हैदराबाद, 19 नवंबर 1997,

27- पी श्रीनिवास राव, इनाडू टेलीविजन (ई टी वी), हैदराबाद, 19 नवंबर 1997,

28- सैदान शफी, दूरदर्शन टीवी, श्रीनगर, 16 मार्च, 1997,

29- अल्ताफ अहमद, दूरदर्शन टीवी, श्रीनगर, 1 जनवरी, 1997,

30- पराग कुमार दास, असोमिया, असम, 17 मई, 1996,

31- गुलाम रसूल शेख, रहनुमा-ए-कश्मीर और केसर टाइम्स, कश्मीर, 10 अप्रैल 1996,

32- मुश्ताक अली, एजेसीं फ्रांस-प्रेस और एशियन न्यूज इंटरनेशनल, श्रीनगर, 10 सितम्बर 1995,

33- गुलाम मोहम्मद लोन, फ्रीलांसर, कंगन, 29 अगस्त 1994,

34- दिनेश पाठक, सन्देश, बड़ौदा, 22 मई 1993,

35- भोला नाथ मासूम, हिंदुस्तान समाचार, राजपुरा, 31 जनवरी 1993

36- एम एल मनचंदा, ऑल इंडिया रेडियो, पटियाला, 18 मई 1992,

37- राम सिंह आजाद आवाज़, डेली अजीत, जालंधर, 3 जनवरी 1992,
38- झारखण्ड के चतरा जिला में इंद्रदेव यादव वर्ष 2016 39-बिहार के सीवान में पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या वर्ष 2016 40-झारखण्ड के हजारीबाग के पत्रकार रवि प्रकाश की हत्या वर्ष 2016 41-झारखण्ड के गिरिडीह में पत्रकार पवित्र केतन की हत्या वर्ष 2017।
दुनिया के कई देशों में पत्रकार सुरक्षा कानून बने हैं, जो पत्रकारों को सही और सच्ची खबर लाने के लिये प्रोत्साहित करते हैं। लेकिन भारत आज भी पत्रकार सुरक्षा कानून से वंचित है।

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