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Thursday, June 30, 2022

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

संपादक की कलम से –

साबरमती रिवर फ्रन्ट से सी प्लेन द्वारा पीएम मोदी का विरोधियों को विकास ‘पागल हो गया है’ का जवाब, मिलेगा देश के गरीबों, बेरोजगारों, आत्महत्या कर रहे किसानों को राहत ?

वाह रे वाह मेरे सरकार !!!

गुजरात 12 दिस. 2017, इसे देश की बिडम्बना ही कहेंगे कि देश की 60 प्रतिसत जनता मंहगायी की मार झेल रही है, बेरोजगार रोजगार की बाट जोह रहे हैं, किसानों को समर्थन मूल्य 50 प्रतिसत लागत मूल्य से अधिक व खेतों को पानी और बिजली मिलने का इंतजार टकटकी लगाये बैठा है, गरीबों को मुफ्त बेहतर चिकित्सा और शिक्षा की दरकार है ।

वहीं दूसरी ओर हमारे मंत्री महोदय जी हाईटेक व्यवस्था जुटाने में लगे हुये है कि देश की जनता को कैसे हाईटेक व्यवस्था से रूबरू करवाया जा सके, ताकि सारी समस्याओं के समाधान को हाईटेक माध्यम से मूर्तरूप दिया जा साके। जिसके माध्यम से देश की गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, मंहगाई, चिकित्सा, और बेहतर शिक्षा व अन्य जुड़े सभी पहलुओं को इस हाईटेक व्यवस्था के माध्यम से पूर्ण किया जा सकने में मदद मिले, ऐसा अथक प्रयास हमारी सरकार के कर कमलों द्वारा किया जा रहा है।

क्योंकि 60 प्रतिसत गरीब जनता ही नही अपितु लगभग 20 प्रतिसत निचले मध्यमवर्गी परिवारों का सीधा लाभ इसी हाईटेक व्यवस्था से ही जुड़ा हुआ है। क्योंकि यदि गुजरात के एक आधा शहर को हाईटेक सुविधाओं से लैस नही किया गया तो गुजरात मॉडल धूमिल हो जायेगा, क्योकि यही हाईटेक व्यवस्था पूरे गुजरात के गरीब जनता, बेरोजगारों, किसानों इत्यादि को ही नही, बल्कि सम्पूर्ण देशवासियों को राहत प्रदान करने वाला है।

मेरे सरकार  जनता ये जानने के लिये उत्सुक ही नहीं ललायित भी है कि मंत्री महोदय जी ने जैसे आनन फानन में ये व्यवस्था सुलभ करायी, यही नहीं प्रधान मंत्री के आग्रह पर उसमें सफर करने का अवसर भी सुलभ कराया गया, देश की 80 प्रतिसत जनता भी इसका लुत्फ़ उठा सकेगी, वो चाहे बुलेट ट्रेन हो या साबरमती फ्रन्ट से विकास का उड़ता हुआ सी प्लेन ?

जैसा मुझे ज्ञात है कि ऐसा ही हाईटेक प्रयोग 2004 के चुनाव के दौरान तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी को एक हॉइकेट सुझाव उनके हाईटेक मंत्री द्वारा दिया गया होगा ? और ‘इंडिया साइनिंग’ पर चुनाव लड़ा गया , लेकिन उसका हश्र क्या हुआ ये सबको विदित है।

क्योंकि 80 प्रतिसत जनता को इन सब्जबागों से कोई सरोकार नहीं होता है, वो तो बस जानती है कि उसके उपभोग की जानें वाली वस्तुयें उसके जेब को कितना नफा या नुक्सान देह व हृदय विदारक है व आज का युवक जिसे अपनी रोजी रोजगार से। ऐसे अनगिनत सवाल हैं जिसके जवाब सरकार को ढूँढने की सख्त जरूरत है।

क्योंकि ईवीएम देवता के चमत्कार को जनता भली भाँति देख व समझ रही है। अन्यथा देश की 135 करोड़ जनता के दिल की आवाज़ ईवीएम देवता को मज़बूरन सुननी ही पड़ेगी। बिहार और दिल्ली के विधानसभा के चुनाव परिणाम जिसके जीते जागते उदाहरण हैं।

क्योंकि ये 80 प्रतिसत जनता जनार्दन जो अपने दो जून की रोटी , कपड़ा और मकान के ताने बाने को बुनने में ही अपनी सारी उम्र खपाती रहती है , जिसे इन्ही जरूरतों को पूरा करने में दातों चनें चबाने पड़ते हैं, तो मेरे अन्नदाता ये बताओ वो इस हाईटेक सुविधाओं को भोगने के लिये घन कहाँ से जुटायेगीं ?

– रवि निगम ( संपादक ‘मानवाधिकार अभिव्यक्ति’ )

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