परिचय
अनुच्छेद 39 क – के अंतर्गत कहा गया है कि राज्य सरकार यह सुनिष्चित करे कि ऐसी न्याय प्रणाली का कार्यान्वयन हो सके , जिससे सबको समान रुप से न्याय मिल सके तथा उचित कानून व योजनाओं द्वारा या अन्य किसी भी तरीके से नि:शुल्क कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराने का विशेष प्रयोजन करे , जिससे सभी नागरिकों को न्याय प्राप्त कराने का अवसर मिल सके ।

अनुच्छेद 21- किसी भी व्यक्ति को उसके प्राण तथा दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित ना रखा जाए,सिवाए उस हालत के जो कानून में बनी प्रक्रियाओं द्वारा स्थापित किए गये हों।

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उच्चतम न्यायालय का आदेश
राज्य ऐसे अभियोगी को जो गरीबी के कारण कानूनी सेवाएं प्राप्त नहीं कर सकता है । उसे नि:शुल्क वैधिक सेवाएं उपलब्ध कराए।

अगर मामले की स्थिति व न्याय की मांग है तो अभियुक्त के लिए वकील नियुक्त करे, पर यह तभी हो सकता है जब अभियुक्त को वकील की नियुक्ति पर आपत्ति ना हो।

मुकदमे की कार्यवाही के दौरान वैधिक सेवाएं न प्रदान कराना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है ।

वकील की नियुक्ति के लिए अभियुक्त को आवेदन देने की आवश्यकता नहीं है ।

मजिस्ट्रेट अभियुक्त को उसके अधिकार से अवगत कराएगा औऱ वकील की नियुक्ति के लिए पूछेगा

सरकार का ये कर्तव्य है कि वह कैदियों को निर्णय की कॉपी उपलब्ध कराए।

गिरफ्तार व्यक्ति अपनी पसंद के वकील से परामर्श कर सकता है ।

वकील से परामर्श करने का अधिकार हर व्यक्ति को प्राप्त है ।

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सीपीसी के आदेश 32 व 33 के अनुसार-
निम्नलिखित गरीब व्यक्ति कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं-

जिस व्यक्ति के पास मुकदमा करने के लिए और कोर्ट की फीस जमा करने के लिए पर्याप्त साधन न हों।

तलाक के मामले में कोई भी महिला कानूनी सहायता प्राप्त कर सकती है।

अऩुसूचित जाति और अऩुसूचित जाति का कोई भी व्यक्ति कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है।

ऐसा व्यक्ति, जिसके पास डिक्री के निष्पादन में कुर्क नहीं की जा सकने वाली संपत्ति तथा विवादग्रस्त विषय के अतिरिक्त 1000 रुपए से अधिक की संपत्ति न हो। उसे कानूनी सहायता मिल सकती है।

भरण-पोषण(गुजारा भत्ता) के मामले में कोई भी व्यक्ति कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है।

बलात्कार से पीड़ित कोई भी महिला नि:शुल्क सहायता प्राप्त कर सकती है।

अपहृत महिला सरकार से कानूनी सहायता प्राप्त कर सकती है ।

16 साल से कम उम्र में अपराध करने वाला वक्ति कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है ।

11000 रुपए से कम आमदनी वाला कैदी या व्यक्ति सरकार से कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है ।

कोई भी बालक, महिला, देह व्यापार, बेगार, लोक उपद्रव, जातिगत हिंसा, जातिगत अत्याचार, बाढ़, मानसिक नर्सिंग होम में रहने वाला व्यक्ति कानूनी सहायता प्राप्त करने का हकदार है।

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सीपीसी 1908 के आदेश 44 के अनुसार
निर्धन व्यक्ति बिना न्यायालय शुल्क दिए अपीलीय न्यायालय में अपील कर सकता है ।

सीपीसी 303 के अनुसार
जिस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई शुरु की गयी है, उस व्यक्ति को यह अधिकार होगा कि वह अपनी प्रतिरक्षा पसंद के वकील से करवा सके।