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Sunday, December 4, 2022

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घर से आ रही थी चिल्लाने की आवाज, कुछ नही कर पाये लोग, और चीखें खामोश, था आग का भयानक ताण्डव । —— तन्सीम अहमद

जयपुर 14/1/18 – शनिवार सुबह 4 बजे ये दर्दनाक हादसा विद्याधर नगर सेक्टर 9 में रहने वाले संजीव गर्ग के मकान में हुआ। हादसे में उनके पिता महेन्द्र गर्ग, बेटी अपूर्वा (23), अर्पिता (21), बेटा अनिमेश (17) और साले के बेटा शौर्य (20) की मौत हो गई। शौर्य मकर संक्रांति मनाने के लिए दो दिन पहले ही जयपुर आया था। संजीव गर्ग पत्नी के साथ आगरा गए थे। हनुमान प्रसाद और उनके बेटे लोकेश ने बताया “सुबह करीब 4 बजे चीखने-चिल्लाने की आवाजें आईं। बाहर निकले तो पीछे वाले घर से संजीव जी की दोनों बेटियां जोर-जोर से आवाज लगा रही थी- ‘कोई हमें बचा लो…आग लग गई।’ हम उनके घर के सामने पहुंचे तो आग की जबरदस्त लपटें और धुआं निकल रहा था। केवल आवाजें सुनाई दे रही थी, दिखाई कोई नहीं दे रहा था। मैं (लोकेश) दौड़कर मकान की छत पर गया। वहां से संजीव के मकान की छत पर जाकर लोहे का गेट तोड़ने की कोशिश की, लेकिन नहीं तोड़ पाया। इसके बाद कॉलोनी के लोगों को जगाया। इस बीच आग की लपटें लोकेश के मकान तक आ गई और उसके मकान के पीछे के दरवाजे और खिड़कियां जल गईं। तेज धुएं, लपटों और मकान के चारों तरफ से बंद होने के कारण कोई मदद के लिए आगे नहीं बढ़ पाया। पड़ोसी विनोद ने बताया “चीखने की आवाजें सुनकर हमने छत पर जाकर देखा तो धुआं निकल रहा था। हम घबरा गए। आग इतनी विकराल थी कि कोई मकान में घुसने की हिम्मत नहीं कर पाया। बाद में एक पुलिसकर्मी छत पर पहुंचा और बेहोश लोगों को निकाला। उन्हें एंबुलेंस से हॉस्पिटल भिजवाया गया। देशराज के अनुसार मैं दीवार पर चढ़ने के बाद रेलिंग को पकड़कर फर्स्ट फ्लोर पर गया। गेट खोला तो धुंआ ही धुंआ था। तभी अनिमेश दिखा। सांसें चल रही थी। मैने रस्सी से उसे किसी तरह उतारा। अस्पताल भेजा पर बचा नहीं पाया। आग सुबह करीब साढ़े तीन बजे ग्राउंड फ्लोर पर वायर या हीटर में शार्ट सर्किट से लगी। आग तेजी से भड़की। आग लगने के 20 मिनट बाद घर में पीछे की ओर जोर के धमाके के साथ सिलेंडर भी फट गया । लोगों के अनुसार पांच से सात मिनट तक दादा और पोतियां मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन आग इतनी भयानक थी कि लोगसमय रहते मदद नहीं कर सके। आग खत्म होने के बाद लोगों ने फर्स्ट फ्लोर के कमरे से अनिमेश और शाैर्य को रस्सी से नीचे उतारा। अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी मौत हो गई। हालांकि, चेतक में तैनात 2015 बैच के ट्रेनी काॅन्स्टेबल देशराज बिजारणियां ने अनिमेश और शौर्य को बचाने की पूरी कोशिश की। पड़ोसियों का कहना है कि वक्त रहते अगर रेस्क्यू किया जाता तो अनिमेश और शौर्य की जान बचाई जा सकती थी। दोनों तक तो आग पहुंची भी नहीं, उनकी तो दम घुटने से ही मौत हो गई।उनकी तो दम घुटने से ही मौत हो गई।

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