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Monday, November 28, 2022

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अंतर्राष्ट्रीय मंडियों में तेल की क़ीमतें 100 डालर प्रति बैरल तक भी पहुंचने के आसार । —- रिपोर्ट – सज्जाद अली नियाणी

तेल की अंतर्राष्ट्रीय मंडियों में उतार चढ़ाव अब इस दिशा में आगे बढ़ रहा है कि कुछ देश अब यह मानने लगे हैं कि तेल की क़ीमतें 100 डालर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती हैं।

दो साल पहले पश्चिमी योरोप के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश ने कहा था कि किसी को भी अब तेल की क़ीमत 100 डालर प्रति बैरल तक पहुंचने के बारे में नहीं सोचना चाहिए लेकिन अब नार्वे ने अपनी यह सोच बदल ली है।

ब्लूमबर्ग मैगज़ी ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि नार्वे के पेट्रोलियम व ऊर्जा मंत्री टोरजे सोविकन्स ने अब जो बयान दिया है वह उनके दो साल पहले के बयान से बिल्कुल अलग है। सोविकन्स ने कहा है कि अब हो सकता है कि तेल की क़ीमतें एक बार फिर 100 डालर प्रति बैरल तक पहुंच जाएं।

ओपेक देशों ने आपसी समन्वय के आधार पर तेल उत्पादन की मात्रा में कमी की है जिससे तेल की क़ीमतें 80 डालर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। मगर इसी बीच रूस और सऊदी अरब ने संकेत दिया कि इस साल के अंत तक हो सकता है कि वह तेल का उत्पादन बढ़ा दें तो तेल की क़ीमतों में गिरावट आई और तेल का मूल्य 75 डालर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

नार्वे के पेट्रोलियम मंत्री का कहना है कि तेल के मूल्य में यह गिरावट कुछ ही समय के लिए है क्योंकि पिछले तीन्पादन बढ़ा दें तो तेल की क़ीमतों म साल में तेल के क्षेत्र में निवेश में आने वाली कमी का असर तेल के उत्पादन पर पड़ा है और जैसे जैस समय बीतेगा इसका असर और भी महसूस होगा। उनका मानना है कि यह स्थिति भी आ सकती है कि तेल का उत्पादन उसकी मांग से कम हो।

तेल उत्पादक देशों में यह सोच पाई जारी है कि तेल के मामले में विश्व की बड़ी शक्तियां भारी हस्तक्षेप करती हैं और तेल की क़ीमतों के निर्धारण में तेल उत्पादक देशों के बजाए बड़ी शक्तियों की मनमानी चलती है जबकि यह स्थिति कदापि ठीक नहीं है।

दूसरी ओर तेल उपभोक्ता देशों के सामने यह चुनौती है कि वह कम दाम पर तेल ख़रीदें ताकि उनकी अर्थ व्यवस्था पर बोझ न पड़े। भारत और चीन जैसे बड़े तेल उपभोक्ता देशों के लिए आर्थिक विकास दर को पटरी पर रखने के लिए तेल की क़ीमतों का कम होना ज़रूरी है।

अब देखना यह है कि अंतर्राष्ट्रीय मंडियों में तेल की क़ीमतों का उतार चढ़ाव क्या रुख़ अख़तियार करता है।

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