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Friday, September 30, 2022

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घरेलू हिंसा के केस में सास व ननद के पास क्या क़ानूनी अधिकार है ?

– रवि जी. निगम / चन्द्र शेखर

यदि आप हिंसा की शिकार हैं। पति, ससुरालीजन या अन्य परिजन परेशान हैं, घबराएं नहीं सास व ननद को बहु के खिलाफ भी क़ानूनी अधिकार प्राप्त हैं। कोई गलत कदम न उठाएं। कानून का सहारा लें। न्याय जरूर मिलेगा। घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 को 26 अक्टूबर 2006 में लागू किया गया था। इसके तहत हर जिले में आठ संरक्षण अधिकारी की नियुक्ति भी की गई है। यह अधिकारी पीड़ित को कानूनी मदद दिलाते हुए शिकायत मजिस्ट्रेट के सामने पेश करता है। पीड़ित की मदद के लिए एक काउंसलर भी मिलता है।

प्रश्न :- क्या सास और बिन ब्याही ननद भी बहु पर घरेलू हिंसा का केस कर सकती है सास व ननद को बहु के खिलाफ क्या क़ानूनी अधिकार प्राप्त है।

उतर :- हम सोचते है की घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 सिर्फ बहु के लिए ही बना है तथा वही घर के बाकी सदस्यों पर केस कर सकती है लेकिन ऐसा नही है, सास और बिन ब्याही ननद भी बहु के खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत केस कर सकती है सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट के अनुसार घरेलू हिंसा कानून सभी महिलाओ के लिए बना है इसमें वे सभी महिला सामिल है जो की उस घर में रहती है वे उस घर में रहने वाले बाकि सदस्यों जो की परुष व स्त्री दोनों हो सकते है के खिलाफ केस कर सकती है | ये प्रावधान पहले नही था पर बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसको मान लिया की परिवार में रहने वाली प्रत्येक महिला को घरेलू हिंसा का अधिकार प्राप्त है वे महिला बहु के अलावा सास, बिन ब्याही ननंद या बेटी भी हो सकती है |

इस अधिनियम के तहत सास भी अपनी बहु (बेटे की पत्नी) के खिलाफ घरेलू हिंसा में केस कर सकती है वो इसमें अपनी बहु को सजा भी करवा सकती है इस केस में अगर सास के नाम वो मकान है तो वह अपनी बहु को कोर्ट के आदेश से उस घर को खली भी करवा सकती है, सास चाहे तो अपने बेटे व उसके बच्चो (पोते और पोतियों) के खिलाफ भी शिकायत दर्ज करवा सकती है |

ये कानून घर में रहने वाली महिलाओं के लिए है जो कुटुंब के भीतर होने वाली किसी किस्म की हिंसा से पीडि़त हैं. इसमें अपशब्द कहे जाने, किसी प्रकार की रोक-टोक करने और मारपीट करना आदि प्रताडऩा के प्रकार शामिल हैं.और वो प्रताड़ना किसी पुरुष या स्त्री दोनों के द्वारा दी जा सकती है घर में आई बहु भी अपनी सास को प्रताड़ित कर सकती है तथा बिन ब्याही ननद को भी परेशान कर सकती है तो कानून ये अधिकार बहु के अलावा सास और ननंद को भी देता है

बहु व ननद के लिए घरेलू हिंसा की परिभाषा क्या हैं:

परिवार का कोई भी पुरुष सदस्य या महिला अगर किसी दुसरी महिला को मारते है, या उसके साथ अभद्र भाषा में बात करते है या उसे किसी भी चीज के लिए विवश करते है तो वे उस महिला के साथ घरेलू हिंसा महिला संरक्षण अधिनियम के अंतर्गतदोषी होते है

सास व ननंद के खिलाफ व्यापक तौर पर घरेलू हिंसा के निम्नलिखित प्रकार है

शारिरिक हिंसा :- अगर बहु अपनी सास या ननद के साथ मारपीट , ठोकर मारना, लात मारना मुक्का मारना, ताना मारना, या किसी अन्य रीति से शारीरिक पीड़ा या क्षति पहुंचाना सामिल है।

मौखिक और भावनात्मक हिंसा:- बहु द्वारा अपनी सास या ननद का अपमान करना, चरित्र पर दोषारोपण करना, ननद को शादी नही होने पर अपमानित करना, ननंद को नौकरी न करने या उसे छोड़ देने के लिए विवश करना, ननंद को उसकी पसंद के व्यक्ति से विवाह न करने देना, किसी विशेष व्यक्ति से विवाह करने के लिए विवश करना, आत्महत्या करने की धमकी देना, कोई अन्य मौखिक दुर्व्यव्हार् अपनी सास व ननंद के साथ करना।

आर्थिक हिंसा:- सास या ननंद को परेशान करना उनको घर के साधन नही इस्तेमाल करने देना, घर पर कब्ज़ा करना, किसी विशेष कमरे में जाने से रोकना अगर सास के नाम मकान है तो उस मकान को खाली नही करना तथा घर के किसी हिस्से पर कब्ज़ा कर लेना इत्यादि।

घरेलू हिंसा के तहत सास के अधिकार :-

जी हा इस इस अधिनियम के तहत सास को भी वे अधिकार प्राप्त है जो की घर बियाह कर आई बहु को प्राप्त है और इस कानून को लागू करने की ज़िम्मेदारी पुलिस अधिकारी, संरक्षण अधिकारी, सेवा प्रदाता या मजिस्ट्रेट की होती है जो की महिला को उसके अधिकार दिलवाने में मदद करते है।

सास के अधिकार निमंलिखित है :

सास चाहे तो अपनी बहु के खिलाफ किसी भी राहत के लिए उसकी प्रताड़ना के खिलाफ आवेदन कर सकती है | इसमें पीड़ित सास को घर में एक सुरक्षित हिस्से में रहने का अधिकार होगा | अगर वह मकान सास के नाम है तो ये अधिनियम बहु को घर से निकलने का अधिकार सास को प्रदान करता है।

बहु की तरह सास को भी कोर्ट के आदेश के द्वारा पुलिस और संरक्षण अधिकारी द्वारा संरक्षण प्राप्त हो सकता है।

सास अपनी बहु के अलावा अपने बेटे व उसके बच्चो के खिलाफ भी संरक्षण प्राप्त कर सकती है।

पीड़ित सास संरक्षण अधिकारी से संपर्क कर सकती है।

पीड़ित सास निशुल्क क़ानूनी सहायता की मांग कर सकती है।

घरेलू हिंसा के तहत ननंद के अधिकार :-

जिस मकान में ननंद अपनी भाभी (बहु) के के साथ रह रही हो | अगर वो मकान दादालाई सम्पति हो तो उसमे उस ननंद का भी अधिकार है | तो ननंद अपने हिस्से से अपनी भाभी, को दूर कर सकती है।

बहु व सास की तरह ही ननंद को भी कोर्ट के आदेश के द्वारा पुलिस और संरक्षण अधिकारी द्वारा संरक्षण प्राप्त हो सकता है।

ननंद अपनी भाभी, भाई, उनके बच्चे और अगर चाहे तो अपने माता पिता के खिलाफ भी कोर्ट से संरक्षण प्राप्त कर सकती है।

पीड़ित ननंद भी संरक्षण अधिकारी से संपर्क कर सकती है।

पीड़ित ननंद कोर्ट से निशुल्क क़ानूनी सहायता ले सकती है।

कोर्ट में शिकायत कैसे करे :

सबसे पहले ये जरूरी है की आप शिकायत कैसे करे क्योकि केस जीतने के लिए सबके पहले केस का मजबूत होना जरूरी होता है |

अपनी शिकायत साफ स्पस्ट और सीधे रूप में लिखे तथा घटनाओ का जिक्र एक रूपता में हो ।

आप अपनी शिकायत धारा 12 के अंतर्गत करे तथा कोर्ट से और भी रिलीफ लेने के लिए बाकी धाराओं का भी उपयोग करे जैसे की धारा 19 के तहत सास व ननंद घर में अपने अधिकार की मांग कर सकती है | तथा बहु को घर से निकालने के लिए सास, धारा 19(1) A तहत बहु को घर से बाहर निकलने का अधिकार भी कोर्ट से मांग सकती है।

अगर कोई मार-पिटाई सास व ननंद के साथ हुई है तो उसकी मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट में लगाये।

इसके अलावा कोई और सबूत जैसे की कोई ऑडियो या विडियो रिकोर्डिंग हो तो उसको भी संकलन करे।

घटना का कोई चश्मदीद गवाह होतो आप उसकी गवाही करवा सकते है।

घरेलू दुर्घटना रिपोर्ट (डीआईआर) क्‍या है?

पीडब्‍ल्‍यूडीवीए के फार्म 1 में डीआईआर का प्रारूप दिया गया है। पीडित महिला इसका इस्‍तेमाल संरक्षण अधिकारी और सेवा प्रदाता के समक्ष घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराने के लिए कर सकती है। यह इस तथ्‍य का रिकॉर्ड होता है कि हिंसा की घटना की रिपोर्ट की गई है, यह एनसीआर (गैर दंडनीय अपराध रिपोर्ट) की तरह है। इसे संरक्षण अधिकारी या पंजीकृत सेवा प्रदाता द्वारा करना पड़ता है और हस्‍ताक्षर करना पड़ता है। यह सार्वजनिक दस्‍तावेज है।

डीआईआर कैसे रिकॉर्ड किया जाता है ?

डीआईआर को महिला के सच्‍चे बयान को विश्‍वास रूप में रिकॉर्ड किया जाता है। इसका अर्थ यह है कि सभी तरह की शिकायतें पीडब्‍ल्‍यूडीवीए के दायरे में पक्षपात रहित रूप में दर्ज की जानी चाहिए।
अगर कोई महिला अपनी पीड़ा नहीं बता पाती, तब संरक्षण अधिकारी उसे बाद में डीआईआर भरने के लिए बुला सकते हैं। संरक्षण अधिकारी महिला के आगमन संबंधी ब्‍योरों का दैनिक डायरी रखेंगे।

डीआईआर रिकॉर्ड होने के बाद क्‍या किया जाता है?

संरक्षण अधिकारी डीआईआर को मजिस्‍ट्रेट को अग्रसारित करते हैं। डीआईआर की एक प्रति क्षेत्राधिकार में आने वाले थाने के प्रभारी को अग्रसारित की जाएगी।
यदि महिला चाहे तो सेवा प्रदाता डीआईआर को संरक्षण अधिकारी तथा मजिस्‍ट्रेट को भेज सकता है। ऐसे मामलों में न्‍यायालय में दाखिल आवेदन के साथ डीआईआर संलग्‍न होना चाहिए।

डीआईआर प्राप्ति पर मजिस्‍ट्रेट को क्‍या करना चाहिए ?

मजिस्‍ट्रेट रिकॉर्ड रखने के लिए डीआईआर सुरक्षित रखेंगे। पीडित महिला द्वारा दाखिल किसी मामले में इसको भेजा जा सकता है। इसका इस्‍तेमाल वैसे मामलों में भी हो सकता है, जो मामला संरक्षण अधिकारी की सहायता से दायर हो और डीआईआर बाद में दिया जाए।

क्‍या पीडित महिला या उसके वकील द्वारा डीआईआर भरा जा सकता है?

नहीं, संरक्षण अधिकारी या पंजीकृत सेवा प्रदाता फार्म-1 में डीआईआर भरेंगे और इस पर दोनों में से एक का हस्‍ताक्षर होगा। चूंकि डीआईआर सार्वजनिक दस्‍तावेज है, इसलिए इसे कोई सरकारी अधिकारी ही भरेगा। अनुच्‍छेद 30 पीडब्‍ल्‍यूडीवीए के अंतर्गत अपने कार्यों के संपादन में सभी संरक्षण अधिकारियों और सेवा प्रदाताओं को लोक सेवक मानता है।

क्‍या पीडित महिला डीआईआर के बिना आवेदन भर सकती है?

हां, पीडित महिला राहत के लिए डीआईआर भरे बिना आवेदन दे सकती है।

जहां महिला राहत के लिए आवेदन करती है, वहां मजिस्‍ट्रेट को केस दर्ज हो जाने के बाद डीआईआर की मांग करनी चाहिए?

न्‍यायालय में आवेदन देते समय डीआईआर की कोई आवश्‍यकता नहीं है, क्‍योंकि डीआईआर का चरण और उद्देश्‍य (हिंसा, घटना की रिकार्डिंग) अस्तित्‍व में नहीं रहता। एक बार न्‍यायालय में आवेदन दाखिल किये जाने के बाद मजिस्‍ट्रेट संरक्षण अधिकारी को घर का दौरा करने का आदेश दे सकता है या नियम 10 (1) के अंतर्गत परिस्थिति के अनुसार रिपोर्ट का आदेश दे सकता है।

क्‍या संरक्षण अधिकारी डीआईआर रिपोर्ट दर्ज करने के लिए घर जा सकता है?

नहीं, संरक्षण अधिकारी न्‍यायालय के आदेश के बिना घर का दौरा नहीं कर सकता।

धारा 2 (क्‍यू) के तहत संबंधियों की परिभाषा में कौन आते हैं?

पीडब्‍ल्‍यूडीवीए में संबंधी शब्‍द परिभाषित नहीं किया गया है। इसलिए इसका सामान्‍य अर्थ निकालना होगा। संबंधियों के उदाहरण पिता, माता, बहन, चाचा, ताऊ और प्रतिवादी का भाई अनुच्‍छेद 2(क्‍यू) में संबंधी के रूप में शामिल किये जा सकते हैं। अनुच्‍छेद 498ए संबंधी शब्‍द का इस्‍तेमाल करता है, जोकि परिभाषित नहीं है। इस तरह संबंधी शब्‍द का सामान्‍य अर्थ में महिला संबंधी भी शामिल होंगी।

क्‍या एक पत्‍नी अपने पति के महिला संबंधियों जैसे सास, ननद के विरूद्ध शिकायत दर्ज करा सकती है?

हां, पति के महिला संबंधियों के विरूद्ध आदेश जारी किये जा सकते हैं। लेकिन अनुच्‍छेद 19(1) के प्रावधान के अनुसार महिला संबंधी के विरूद्ध बेदखली की छूट नहीं दी जा सकती। अनुच्‍छेद 19(1) की राय में अनुच्‍छेद 19 (1 बी) के तहत प्रतिवादी (महिला) को साझी गृहस्‍थी से हटाने का आदेश पारित करने का निर्देश नहीं देता।

पीडि़त महिला अपने पति के पुरूष संबंधियों या अन्‍य पुरूष साथियों के विरूद्ध सुरक्षा प्राप्‍त कर सकती है। भरण-पोषण भत्‍ता (मौद्रिक सहायता के लिए आदेशों के तहत) वही व्‍यक्ति प्राप्‍त कर सकते हैं, जो अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के दायरे में आते हैं।

– क्‍या एक सास अपनी बहू के विरूद्ध राहत के लिए आवेदन कर सकती है?

– नहीं, सांस बहू के विरूद्ध आवेदन नहीं कर सकती (अनुच्‍छेद 2 (क्‍यू), लेकिन पुत्र और बहू के हाथों हिंसा झेल रही सास अपने बेटे और बहू के विरूद्ध, बेटे द्वारा किये गये हिंसा अपराध में बढ़ावा देने के लिए, आवेदन दायर कर सकती है। लेकिन सास साझी गृहस्‍थी से बहू की बेदखली की मांग नहीं कर सकती।

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