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Thursday, September 29, 2022

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विफल हो गई अमरीकी समुद्री गठबंधन की योजना ।

रिपोर्ट – सज्जाद अली नया ने

फ़ार्स की खाड़ी में समुद्री गठबंधन बनाने के उद्देश्य से अमरीका ने कई सप्ताह पहले संसार के देशों से इसमें शामिल होने का आह्वान किया था।

विदेश – अमरीका के इस आह्वान पर नकारात्मक उत्तर दिया गया यहां तक कि अमरीका का घटक माने जाने वाले यूरोपीय संघ ने भी इसे रद्द कर दिया। अभी हाल ही में फ़्रांस के रक्षामंत्री Florence Parly फ्लोरेंस पैरी ने कहा है कि अमरीका के नेतृत्व में फ़ार्स की खाड़ी में बनाए जाने वाले समुद्री गठबंधन में यूरोपीय संघ भाग नहीं लेगा।

उन्होंने कहा कि यूरोपीय देश, फ़ार्स की खाड़ी में व्यापारिक जहाज़ों की पहरेदारी का विरोध करते हैं। अमरीका की ओर से फ़ार्स की खाड़ी में सैन्य शक्ति बढ़ाने और कुछ उत्तेजक कार्यवाहियों के कारण तनाव बढ़ गया है। अमरीका की उत्तेजक कार्यवाहियों में से एक, अमरीका के जासूसी ड्रोन की ओर से ईरान की वायुसीमा का उल्लंघन भी था जिसे ईरान ने मार गिराया।

इसी बीच अमरीका के उकसावे पर ब्रिटेन ने जिब्राल्टर स्ट्रेट में ईरान के ग्रेस-1 तेल वाहक जहाज़ को रोक दिया जिसके जवाब में ईरान ने हुरमुज़ स्ट्रैट में समुद्री नियमों का उल्लंघन करने वाले ब्रिटेन के एक तेलवाहक जहाज़ को रोक लिया। इसी बीच अमरीका ने स्थिति का दुरूपयोग करते हुए विश्व के 60 देशों से अपने दृष्टिगत समुद्री गठबंधन में सहयोग करने का आह्वान किया।

अपने इस काम से अमरीका ने दो प्रकार से लाभ उठाने का प्रयास किया। पहला यह कि ईरान पर अधिक से अधिक दबाव बढ़ाया जाए और दूसरे क्षेत्र को तनावग्रस्त दर्शाकर अपने अरब घटकों से मोटी रक़म एैंठी जाए।

ट्रम्प के आह्वान और वाशिग्टन के अथक कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद मात्र तीन देशों के सहयोग से अमरीका के समुद्री गठबंधन ने गुरूवार से अपना काम शुरू किया। इस काम में केवल ब्रिटेन, बहरैन और आस्ट्रेलिया ने ही अमरीका का साथ दिया।

यूरोपीय देशों में जर्मनी और फ़्रांस के अधिकारियों ने पिछले सप्ताहों के दौरान ही कह दिया था कि वे ट्रम्प के दृष्टिगत समुद्री गठबंधन का भाग नहीं बनना चाहते। इसी बीच फ़्रांस की रक्षामंत्री के इस बयान ने कि यूरोपीय संघ, इस गठबंधन का भाग नहीं बनेगा, एक प्रकार से अमरीकी राष्ट्रपति के प्रयासों को पूरी तरह से विफल बना दिया।

चीन और रूस तो पहले से ही इस अमरीकी गठबंधन का विरोध करते रहे हैं। अब देखना यह है कि अमरीका की इस योजना में फ़ार्स की खाड़ी के देश कहां पर खड़े हैं और क्या वे फ़ार्स की खाड़ी में अमरीका और उसके घटकों की ओर से बढ़ाए जा रहे तनाव का मुक़ाबला करने में सक्षम हैं?

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