-रवि जी. निगम

मित्रों / भाइयों बहनों ये है सत्ता की चासनी का कमाल जब जुबां पे लग जाती है तो ऐसे ही कमाल देखने को मिलते हैं, ये है राजनीति, इसमें कब दोस्त दुश्मन बन जाता है कब दुश्मन दोस्त ये राजनैतिक कालचक्र पर निर्भर करता है, बस इसकी सबसे बडी सच्चाई ये है कि ‘येन केन प्रकारेण’ सत्ता और कुर्सी की ललक पर निर्भर करता है कि कौन कब और कहाँ पाला बदलेगा ये राजनैतिक कालचक्र पर निर्धारित करता है, ….”ये क्या हुआ कैसे हुआ क्यों हुआ, ये छोडों ये न सोंचो….!!”

लखनऊ : केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा ने एक नाटकीय घटनाक्रम में बसपा प्रमुख मायावती की ओर मदद का हाथ बढ़ाने का फैसला किया. भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में बसपा के उम्मीदवार रामजी गौतम की जीत सुनिश्चित करने का निर्णय किया है.

भाजपा के पास हैं 21 अतिरिक्त वोट
दरअसल, भाजपा राज्यसभा चुनाव के तहत उत्तरप्रदेश में 9वीं सीट पर भी अपना प्रत्याशी खड़ा कर सकती थी, क्योंकि उसके पास 21 अतिरिक्त वोट थे और उसे 16 अन्य मतों की आवश्यकता थी. राज्य में जीत हासिल करने के लिए किसी भी राज्यसभा प्रत्याशी को 37 मतों की दरकार है.

अखिलेश को मात देने का फैसला
राज्य में राजग के पास 317 विधायकों का समर्थन है और इसके चलते भाजपा ने 8 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. कांग्रेस एवं बसपा के कुछ विधायक तथा कई निर्दलीय विधायक भी भाजपा का समर्थन करने की तैयारी में थे. लेकिन, भाजपा ने अपना 9वां उम्मीदवार उतारने के बजाय समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को मात देने के उद्देश्य से बसपा का साथ देने का फैसला किया.

सतीशचंद्र मिश्रा के साथ समझौता फाइनल
हॉर्स-ट्रेडिंग का सहारा न लेते हुए भाजपा आलाकमान ने राज्यसभा में बसपा के नेता सतीशचंद्र मिश्रा के साथ इस बारे में समझौता फाइनल कर दिया. राज्यसभा चुनाव के लिए सपा द्वारा अपना दूसरा प्रत्याशी खड़ा करना भी हैरानी भरा कदम है, क्योंकि विधानसभा में पार्टी के पास सिर्फ 47 विधायक हैं.

विधान परिषद चुनाव में बसपा को देना होगा साथ
भाजपा आलाकमान और बसपा के बीच आगामी विधान परिषद चुनाव के सिलसिले में सहमति बनी है. भाजपा ने इस शर्त पर बसपा को राज्यसभा सीट देने का फैसला किया है कि विधान परिषद के चुनाव में मायावती अपनी पार्टी के अतिरिक्त वोट भाजपा के पाले में डालेंगीं.