कन्नौज (यूपी) जज के फर्जी हस्ताक्षर और मुहर लगाकर आर्डर जारी करने वाले गैंग की मजबूत जड़ें पुलिस के सामने आ रही हैं। अभी तक की जांच में गैंग में तीन अधिवक्ता और दो सरकारी कर्मचारियों के शामिल होने के बारे में पता चला है। एक सरकारी कर्मचारी एआरटीओ कार्यालय तो दूसरा जिला एवं सत्र न्यायालय में तैनात है। गिरोह का सरगना हाल में ही वकील बना है। वह अपनी दुकान से जाली आर्डर तैयार करता था। 

इटावा जनपद के थाना बसरेहर के गांव दरौल में रहने वाले किसान जन्मेद सिंह का ट्रैक्टर एक माह पहले एआरटीओ ने इंदरगढ़ थाना क्षेत्र में पकड़ लिया था। उसे ओवरलोडिंग में उसे सीज किया गया था। जन्मेद सिंह को कुछ लोगों ने गुमराह कर 53 हजार रुपये लेकर फर्जी रिलीज आर्डर पकड़ा दिया था। मामला गंभीर होने की वजह से पूरे मामले की जांच इंदरगढ़ थाना प्रभारी विमलेश कुमार खुद कर रहे हैं। मामले की जांच में सामने आया है कि गैंग में तीन वकील और दो सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। यह लोग कई दिन से सीज होने वाले वाहन मालिकों से मोटी रकम लेकर फर्जी रिलीज आर्डर थमा देते थे। थाना प्रभारी ने बताया कि जन्मेद के मोबाइल से कई रिकार्डिंग और वीडियो मिले हैं। इन्हें साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित कर लिया गया है। 
वाहन सीज होते ही सरगना को मिलती थी सूचना 

एआरटीओ की ओर से वाहन सीज होते ही गैंग के सरगना को वाहन मालिक, मोबाइल और पते की जानकारी सूत्र के जरिए मिल जाती थी। इसके बाद वह वाहन स्वामी से बात कर जल्द से जल्द रिलीज आर्डर बनवाने की बात कहकर मोटी रकम ले लेता था। बाद में फर्जी आर्डर पकड़ा देता था।
आरोपियों के हस्ताक्षर के नमूने लेगी पुलिस

पुलिस गैंग के लोगों तक पहुंच चुकी है। अब पुलिस मुहर बरामद करने के साथ आरोपियों से तीन बार फर्जी रिलीज आर्डर के बने हस्ताक्षरों के नमूने लेगी। मामले से जुडे़ सभी साक्ष्य इकट्ठे कर पुलिस आरोपियों को जेल भेजेगी।

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