-रवि जी. निगम

वी- डेम के मुताबिक भारत में लोकतंत्र की बिगड़ती स्थिति चिंताजनक है, ‘उदार लोकतंत्र सूचकांक’ में भारत 179 पायदान पर, ये संस्थान दुनियाभर के 3,200 विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करती है।

स्वीडन स्थित वी-डेम संस्था ने ‘डेमोक्रेसी 2020’ नाम से रिपोर्ट जारी की है, जिसमें भारत में लोकतंत्र की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है। गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय के वी-डेम इंस्टिट्यूट ने अपनी स्टडी में पाया है कि भारत में लोकतंत्र कमजोर पड़ता जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान मीडिया, नागरिक समाज और विपक्ष के लिए जगह लगातार सिकुड़ता जा रहा है। उनकी आवाज को दबाया जा रहा है। भारत ‘निरंकुशता’ की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट में यहां तक कहा गया है कि भारत गंभीर रूप से लोकतंत्र के रूप में अपनी स्थिति को खोने के कगार पर है।

रिपोर्ट में जी -20 देशों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि ये देश बड़े पैमाने पर निरंकुशता की ओर बढ़ रहे हैं जिसमें ब्राजील, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और तुर्की जैसे प्रमुख देश शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दस वर्षों में हंगरी, तुर्की, पोलैंड, ब्राजील और भारत ‘निरकुंशता’ की ओर अत्यधिक बढ़ा है।

स्वीडन के गोटेनबर्ग विश्वविद्यालय से जुड़ी संस्था वी- डेम के मुताबिक भारत में लोकतंत्र की बिगड़ती स्थिति चिंताजनक है। रिपोर्ट में ‘उदार लोकतंत्र सूचकांक’ में भारत को 179 देशों में 90वाँ स्थान दिया गया है जबकि डेनमार्क को पहला स्थान मिला है। वहीं, भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका और नेपाल दोनों भारत से आगे है। श्रीलंका को 70वां स्थान और नेपाल को 72वें नंबर पर शामिल किया गया है। पाकिस्तान 126वें नंबर पर है और बांग्लादेश को 154वां स्थान मिला है। रिपोर्ट में लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ माने जाने वाले मीडिया, मानवाधिकार और न्यायतंत्र की स्वतंत्रता में गिरावट पर चर्चा की गई है। प्रेस से जुड़े लोगों के खिलाफ बढ़ रहे लोगों के खिलाफ राजद्रोह से लेकर मानहानि तक की बढ़ती मुकदमेबाजी का भी जिक्र किया गया है।

वी-डेम ने अपनी रिपोर्ट का नाम ‘आटोक्रेटाइज़ेशन सर्जेज- रेजिस्टेंस ग्रो’ यानी ‘निरंकुशता बढ़ी’ है। स्वीडन स्थित वी-डेम यानी वैरायटी ऑफ़ डेमोक्रेसी इंस्टिट्यूट एक स्वतंत्र अनुसंधान संस्थान है, जिसकी स्थापना 2014 में की गई थी। ये संस्थान दुनियाभर के 3,200 विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करती है। रिपोर्ट में भारत में लोकतंत्र को लेकर जताई गई चिंता के अलावा दुनियाभर के देशों में कमजोर होते लोकतंत्र को लेकर भी विस्तृत से चर्चा की गई है।

(साभार ई. खबर)