– रवि जी. निगम

नयी दिल्ली : बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को निर्देश दिया है कि पूछताछ करने और गिरफ्तार करने का अधिकार प्राप्त केन्द्रीय जांच ब्यूरो, राष्ट्रीय जांच एजेन्सी और प्रवर्तन निदेशालय सहित इन सभी जांच एजेन्सियों के कार्यालयों आदि में सीसीटीवी कैमरे लगाये जायें।

न्यायमूर्ति रोहिन्टन फली नरिमन, न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस की पीठ ने कहा है कि राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक थाने में प्रवेश और निकासी के स्थान, मुख्य प्रवेश द्वार, हवालात, सभी गलियारों, लॉबी, स्वागत कक्ष क्षेत्र और हवालात कक्ष आदि के बाहर के क्षेत्रों में भी सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगे होने चाहिये। इससे पूर्व भी उच्चतम न्यायालय ने मानव अधिकारों के हनन के मध्येनजर अंकुश लगाने के लिये प्रत्येक थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था।

उक्त पीठ ने आदेश में कहा कि “इसके अलावा, केन्द्र सरकार को भी यह निर्देश दिया जाता है कि वह सीसीटीवी कैमरे और रिकार्डिंग उपकरण सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय, नार्कोटिक कंट्रोल ब्यूरो, राजस्व गुप्तचर निदेशालय, एनआईए, संगीन अपराध जाँच कायार्लय आदि दूसरी एजेंन्सियां जिन्हें पूछताछ करने और गिरफ्तार करने का अधिकार प्राप्त है आदि के कार्यालयों में भी ये उपकरण लगाये जायें।”
न्यायालय ने कहा कि “चूंकि इनमें से अधिकांश एजेन्सियां अपने कार्यालयों में ही पूछताछ करती है, जहाँ सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से इन सभी कार्यालयों में लगाये जायेंगे जहां आरोपियों से पूछताछ की जाती है और जहाँ उन्हें हवालात की तरह ही रखा जाता है।”

न्यायालय ने कहा कि इस साल सितंबर माह में उसने अपने तीन अप्रैल, 2018 के आदेश के अनुरूप ही प्रत्येक थाने में सीसीटीवी कैमरे लगे होने के स्थानों और निगरानी समिति के गठन के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिये इन सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को इसमे पक्षकार बनाया था।

न्यायालय ने हिरासत में यातनाओं से जुड़े मामले पर भी विचार करते हुये इस साल जुलाई माह में, 2017 के न्यायालय के उस आदेश का भी संज्ञान लिया था जिसमे मानव अधिकारों का दुरूपयोग रोकने और घटना स्थल की वीडियोग्राफी करने के लिये इन सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और एक केन्द्रीय निगरानी समिति तथा प्रत्येक राज्य तथा केन्द्र शासित प्रदेश में निगरानी समिति गठित करने का आदेश भी दिया गया था।