आजीवन सजा काट रहे बुजुर्ग का जेल में अच्छा आचरण काम आया।बीमार पत्नी की फरियाद पर उन्हें पेरोल मिल गई।

छिबरामऊ (कन्नौज) कसावा निवासी 76 बर्षीय नछत्र सहाय दुबे डांक विभाग में पोस्ट मास्टर थे। बर्ष 2004 में लोकसभा के चुनाव के दौरान हरिओम यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।इसी केश में वह आजीवन कारावास की सजा काट रहे है जेल में समय बिताने के लिए उन्होंने कागज कलम उठा ली। ऐसा मन लगा की उन्होंने सीता की खोज, विभीषण शरणागत जैसे कई खंड काव्य लिख दिए तथा उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ पर भी काव्य लिख दिया।इसी बीच नछत्र सहाय दुबे की पत्नी की तवियत बिगड़ गई तथा उन्हें कई बीमारियों ने घेर लिया। इसी को लेकर उनकी पत्नी की तरफ से उन्हें पेरोल पर छोड़ देने की फरियाद की गई।

उनके अच्छे आचरण की बजह से उन्हें पेरोल पर रिहा करने के आदेश जिलाधिकारी कन्नौज को दिए गए।जिलाधिकारी ने मंगलवार को जेल अधीक्षक को सम्बंधित आदेश दिया।अतः उन्हें 11 बजे के करीब नछत्र सहाय दुबे को उनके गांव लाया गया। उनके घर आने से पूरे परिवार में खुशियो की बहार आ गई।तथा मिलने जुलने बालों का तांता लग गया पत्नी के ठीक होने पर उन्हें फिर जेल बापस लाया गया।