पति की मौत के बाद परिजनों ने मारपीट कर महिला को घर से निकाल दिया। इस पर पीडि़ता ने अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते हुए आत्मदाह करने की चेतावनी दी थी। बुधवार को गांव पहुंचे एसडीएम तिर्वा ने पीडि़त महिला को मकान व जमीन दिलाते हुए कोई समस्या न होने का आश्वासन दिया।

एसडीएम ने गांव पहुंचकर महिला को दिलाया मकान

महिला की जमीन के हिस्से की जमीन की पैमाइस करवाते एसडीएम, व लेखपाल

कन्नौज(यूपी) नगला बक्स गांव की स्नेहलता ने बताया कि उसके पति अवधेश सिंह की 2017 में मौत हो गई थी। वह अपनी पुत्री निशा के साथ गांव में ही रह रही थी, उसके ससुर ने अपने बेटों के साथ मिलकर उसे घर से बाहर निकाल दिया। उसने अपने हिस्से को पाने के लिए कई बार प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हुई। महिला ने जमीन के लिए सिविल कोर्ट में ससुरालीजनों के खिलाफ मुकदमा भी दायर किया, जो विचाराधीन है। वहीं वह नगर में किराए के मकान में रहकर मजदूरी कर अपना और बेटी का भरणपोषण कर रही है।

19 दिसंबर को महिला ने उच्चाधिकारियों सहित थाने में प्रार्थना पत्र देकर न्याय न मिलने पर आत्मदाह की चेतावनी दी थी। मामला अधिकारियों तक पहुंचते ही हड़कंप मच गया। आनन-फानन में बुधवार को एसडीएम तिर्वा जयकरन सिंह, नायब तहसीलदार मोहितलाल वर्मा, प्रभारी निरीक्षक विजयबहादुर वर्मा राजस्व टीम के साथ गांव पहुंचे। उन्होंने महिला के ससुर रामरतन से बात कर महिला को पूर्व में रह रहे मकान के साथ गाटा संख्या 447 की 4 बीघा जमीन में से 1/3 का हिस्सा चिन्हांकन के बाद दिलाया।

स्नेह लता ने बताया कि उसका मायका इटावा के सौथना गांव में है। 1997 में गुरसहायगंज के ग्राम मुड़ा निवासी सुखेंद्र से उसकी शादी हुई थी, जिससे दो बच्चे हुए थे। उनकी शादी हो चुकी है। पति का चालचलन सही न होने से वह पति के बहनोई रामरतन के संपर्क में आ गई। रामरतन जब कभी उसे अपने गांव भी ले जाने लगा। वर्ष 2011 में रामरतन अपने दूसरे नंबर के बेटे अवधेश के साथ तहसील ले जाकर उसकी शादी करा दी और फिर उन दोनों के संसर्ग से एक बेटी का जन्म हुआ। जून 2017 में पति की मौत होने से रामरतन ने अन्य बेटोंं के साथ मिलकर उसके साथ मारपीट करते हुए उसे और उसकी बेटी को घर से निकाल दिया। कई बार प्रयास किया गया, लेकिन वह लोग हिस्सा देने को तैयार नहीं हुए।