मेरठ – उत्तर प्रदेश पुलिस, तीन अलग-अलग घटनाओं में पिछले हफ्ते पकड़े गए 4 पुलिसकर्मियों की करतूत से विभाग की हो रही है फजीहत, जिसमेेें 6 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। यूपी पुलिस सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर भी जमकर ट्रोल हो रही है। पीलीभीत जिले में 17 जनवरी को उत्तर प्रदेश पुलिस के दो कॉन्स्टेबल भी सस्पेंड किए गए। उन पर वसूली-कम-सेक्स रैकेट चलाने का आरोप था।

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जिला हापुड़ में यूपीएसआईडीसी आउटपोस्ट पर तैनात उत्तर प्रदेश पुलिस के सब इंस्पेक्टर बृजेश कुमार यादव को मेरठ में शराब माफिया से संबंध होने के चलते गिरफ्तार किया गया। दो संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के भी गोरखधंधे में शामिल होने का खुलासा हुआ था।पुलिस विभाग को उस वक्त सबसे अधिक शर्मिंदगी उठानी पड़ी जब गोरखपुर जिले में डकैतों के गैंग का खुलासा हुआ। महाराजगंज जिले निवासी दो सर्राफा कारोबारियों को गोरखपुर से लखनऊ जाने के लिए बस पकड़ते वक्त 35 लाख रुपये की लूट की। पुलिसकर्मियों ने पहले उन्हें अगवा किया और फिर जूलरी व नकद वसूले।

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एडीजी प्रशांत कुमार (कानून-व्यवस्था)
उत्तर प्रदेश पुलिस के असली पुलिसवाले ही निकले लुटेरे

अधिकारियों ने प्रथम दृष्टया जांच में बताया कि अपराधियों ने पुलिस की वर्दी में लूट की थी लेकिन जांच में असली पुलिसकर्मियों की करतूत सामने आई तो सबके होश फाग़्ता हो गए। सब इंस्पेक्टर धर्मेंद्र यादव और बस्ती जिले में तैनात दो कॉन्स्टेबल महेंद्र यादव व संतोष यादव को गिरफ्तार कर लिया। गोरखपुर एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने दावा किया कि यह गिरोह पिछले महीने शहर में हुई दूसरी लूट में भी शामिल था। एडीजी प्रशांत कुमार (कानून-व्यवस्था) ने कहा, ‘उन्हें ड्यूटी से निष्कासित करके जेल भेज दिया गया। सरकार या विभाग की ओर से कोई ढिलाई नहीं की गई है।

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