कासगंज – हाई कोर्ट के निर्देश पर जिले में बर्खास्त हुए 65 शिक्षको ने इस फैसले को चैलेंज करने का मन बनाया है। शिक्षको ने सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। जिसपर अधिवक्ताओं से राय मशविरा भी किया जा रहा है। वहीं शिक्षक वकीलों की राय पर हाई कोर्ट में भी पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने एसआईटी जांच के बाद जिले के 65 शिक्षकों को बर्खास्त किया है। उन पर आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों से नौकरी की जा रही थी। विभाग ने शिक्षकों की तनख्वाह भी रोक दी है। सभी शिक्षकों पर मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है।

अधिक महत्वपूर्ण जानकारियों / खबरों के लिये यहाँ >>क्लिक<< करें

हाई कोर्ट के निर्देश पर विभाग द्वारा लिए गए, फैसले को लेकर बर्खास्त शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है। सभी शिक्षक समूह बनाकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में जुट गए हैं। अधिवक्ताओं से बातचीत का दौर शुरू हो गया है। शिक्षक देवेंद्र कुमार का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता राय देते हैं, तो एक बार हाई कोर्ट में भी पुनर्विचार याचिका दाखिल कर मामले की सुनवाई कराई जाएगी। इसके लिए हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं से भी बर्खास्त शिक्षकों की राय मशविरा किया जा रहा है। 

यह है बर्खास्तगी का मामला
4 वर्ष पूर्व शिक्षकों के दस्तावेजों के फर्जीवाड़े मामले को लेकर विभाग को शिकायत मिली। प्रदेश की तत्कालीन सरकार के निर्देश पर एसआईटी ने इसकी जांच की। इसमें कासगंज जिले के 91 शिक्षक की डिग्री फर्जी पाई गई। उसे लेकर फौरी तौर पर शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को निलंबित कर दिया। सभी शिक्षक हाईकोर्ट चले गए। विभाग की कार्यवाही पर स्टे मिल गया। शिक्षकों की बहाली हो गई। इसके बाद जब सुनवाई हुई तब हाईकोर्ट ने शिक्षकों को अयोग्य घोषित कर विभाग को जांच पड़ताल करने एवं इनके विरुद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए। इसी मामले में बीएसए अंजलि अग्रवाल ने जिले के सभी शिक्षकों की विभागीय जांच मे दोषी पाए जाने पर 65 शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया। जबकि शेष शिक्षकों की अभी विभागीय जांच जारी है। 

निडर, निष्पक्ष, निर्भीक चुनिंदा खबरों को पढने के लिए यहाँ >> क्लिक <<करे

नहीं की जाएगी तनख्वाह की रिकवरीहाईकोर्ट में विभागीय कार्रवाई पर स्टे लेने के लिए पहुंचे शिक्षकों ने अपनी याचिका में जो तथ्य दिए, उनके आधार पर हाईकोर्ट ने विभाग में सेवाकाल के दौरान की तनख्वाह बहाली के भी निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट का कहना है कि जब तक विभाग में सेवाएं दी गई हैं। तब तक तनख्वाह प्रदान की जाए। शिक्षकों से किसी तरह की रिकवरी नहीं की जाए। 

अब तक हो चुका है 12 के विरुद्ध मुकदमा दर्ज शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़ा के आधार पर नौकरी कर रहे शिक्षकों की बर्खास्तगी कर दी गई है। इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारियों को बेसिक शिक्षा अधिकारी अंजलि अग्रवाल ने निर्देश दिए हैं, कि संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध इलाका के थाने में मुकदमा पंजीकृत कराए। इस के चलते अब तक जिले में 12 शिक्षकों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराए जा चुके हैं। पटियाली के खंड शिक्षा अधिकारी श्रीकांत सिंह पटेल ने गंजडुंडवारा एवं सिढ़पुरा ब्लॉक के एक-एक शिक्षक पर मुकदमा दर्ज कराया है। जबकि अमापुर के खंड शिक्षा अधिकारी गिर्राज सिंह ने सहावर ब्लॉक के दो एवं अमापुर ब्लॉक के आठ खंड शिक्षा बर्खास्त शिक्षकों पर मुकदमा दर्ज करा दिया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी का कहना है कि जल्द ही सभी शिक्षकों के विरुद्ध संबंधित थानों में मुकदमा दर्ज हो जाएगा।

‘लोकल न्यूज’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से ‘नागरिक पत्रकारिता’ का हिस्सा बनने के लिये यहाँ >>क्लिक<< करें

यह तर्क हैं बर्खास्त शिक्षको का बर्खास्त शिक्षक अतुल भदोरिया का कहा है कि संबंधित महाविद्यालय या फिर यूनिवर्सिटी ने उनकी परीक्षा कराई, परिणाम आया, प्रमाण पत्र जारी किए गए, जिनके आधार पर नौकरी पाई। प्रमाण पत्रों की जांच विभाग को प्रारंभिक दौर में ही करनी चाहिए। यदि प्रमाण पत्र फर्जी थे तो कार्यवाही क्यों नहीं की गई। शिक्षकों का कहना है कि संबंधित विभाग भी इसके लिए पूर्णतया दोषी है। विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके अलावा बर्खास्त शिक्षकों के साथ हुई अन्य शिक्षकों की नियुक्ति के संबंध में भी जांच पड़ताल की जानी चाहिए। स्कैम के संबंध में जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।