एक महीने बाद यमन के ख़िलाफ़ सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात द्वारा शुरू किए गए युद्ध को सात साल हो जाएंगे। यह वह युद्ध है जिसकी शुरुआत में सऊदी युवराज दावा कर रहे थे कि वे यमन को कुछ ही हफ़्तों में या ज़्यादा से ज़्यादा कुछ महीनों में सऊदी अरब की बांहों में ले आएंगे। आज जो कुछ ज़मीनी स्तर पर दिखाई दे रही है, वह सऊदी अरब की पराजय और उसका धराशायी होना है।

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आज हम यमन में जो कुछ देख रहे हैं वह चौंका देने वाले व ड्रामाई परिवर्तनों से लेकर सऊदी युवराज की ओर से अपने कट्टर दुश्मन यानी अर्दोग़ान से यमन युद्ध में मदद की भीख मांगना है। इसका उद्देश्य यमन में सऊदी अरब की पराजय की औपचारिक घोषणा को विलम्बित करना है। प्राप्त रिपोर्टों से पता चलता है कि तुर्की का गुप्तचर विभाग उन लड़ाकों की लिस्ट तैयार कर रहा है जो यमन में सऊदी बलों के साथ मिल कर लड़ने में रुचि रखते हैं। इन रिपोर्टों से पता चलता है कि तुर्की यमन में सऊदी अरब से  सैन्य सहयोग शुरू कर रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में उसने कारायल ड्रोन सऊदी अरब के हवाले किए हैं।

कई सूत्रों ने बताया है कि तुर्की ने सऊदी अरब को युद्धक ड्रोन भी देने शुरू कर दिए हैं ताकि इस तरह अमरीका द्वारा सऊदी अरब को हथियारों की बिक्रि रोके जाने की क्षतिपूर्ति की जा सके क्योंकि अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने हाल ही में यमन युद्ध में सऊदी अरब का समर्थन रोकने का फ़ैसला किया है। दो अत्यंत पारदर्शी बातें यमन के ख़िलाफ़ सऊदी अरब, इस्राईल, इमारात और अमरीका के गठजोड़ का अंजाम स्पष्ट करती हैं। पहली, सऊदी अरब के अंदर यमन के मीज़ाइलों और ड्रोनों की उड़ान जो ज़हरान, दम्माम और रासुत्तनूरा तक पहुंच गए हैं और सऊदी अरब के रडार और एंटी मीज़ाइल सिस्टम उन्हें रोकने और ध्वस्त करने में विफल हो गए हैं।

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इसी परिप्रेक्ष्य में यमनी बलों के प्रवक्ता यहया सरी ने देश के सैन्य उद्योग के अनावरण की सूचना दी। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि शहीद नेता सैयद हुसैन बदरुद्दीन अलहूसी की शहादत की बरसी पर अगले दो दिन में सैन्य उद्योग विशेष कर रणनैतिक हथियारों की एक प्रदर्शनी लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी में यमन के रक्षा उद्योग में होने वाली अभूतपूर्व प्रगति को दिखाया जाएगा।

दूसरी बात सऊदी अरब की सरकार से संबंधित है। सऊदी युवराज मुहम्मद बिन सलमान के लिए स्थिति इस हद तक असहनीय और पीड़ादायक हो चुकी है कि उन्होंने देश के तेल प्रतिष्ठानों और सैनिक व रणनैतिक लक्ष्यों पर हमले की फ़िल्में पोस्ट किए जाने के संबंध में जनता को धमकी दी है। कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने बताया है कि सऊदी अरब पर अंसारुल्लाह के हमलों की वीडियो क्लिप पोस्ट करने की स्थिति में उन्हें सऊदी अरब के अधिकारियों और इंटेलीजेंस की ओर से धमकियां मिलती हैं। सऊदी लीक्स के अनुसार सऊदी अरब की सुरक्षा एजेंसियों और साइबर आर्मी ने धमकी दी है कि जो भी देश पर यमनी बलों के हमलों की वीडियो क्लिप पोस्ट करेगा, उसके ख़िलाफ़ कार्यवाही की जाएगी।

यमन के मुक़ाबले में सऊदी अरब की कमज़ोरी इस बात का कारण बनी है कि सऊदी नागरिकों ने सोशल मीडिया पर नाकाम रक्षा मंत्री हेशटैग बना कर उसे फैला दिया है। इससे सोशल मीडिया पर मुहम्मद बिन सलमान का जम का मज़ाक़ उड़ रहा है। अनेक यूज़र्स देश के अहम ठिकानों व प्रतिष्ठानों की रक्षा करने में अक्षमता के कारण मुहम्मद बिन सलमान को उनके पद से हटाए जाने की मांग कर रहे हैं। यह ऐसी स्थिति में है कि यह समय बिन सलमान के लिए अत्यंत कठिन और संवेदनशील है क्योंकि जमाल ख़ाशुक़जी हत्याकांड में अमरीका की नई सरकार हाथ धो कर उनके पीछे पड़ी हुई है।

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बहरहाल सऊदी अरब के युवराज बिन सलमान के पास यमन युद्ध को समाप्त करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है ताकि इस तरह वे अपनी निरंतर पराजयों का सिलसिला रोक सकें। उनकी ओर से तुर्की के सामने हाथ फैलाना और उससे ड्रोन विमान लेना ठीक उस डूबते हुए आदमी की तरह है जो अपने आपको बचाने के लिए किसी भी चीज़ का सहारा लेने को तैयार रहता है।