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कार से विदा करा कर लिए जा रहे पति ने, विवाहिता को जिंदा जलाया

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कार में बिठाकर विवाहिता को जिंदा जलाया

छिबरामऊ(कन्नौज) कोतवाली क्षेत्र के पृथ्वीपुर गांव के एक व्यक्ति ने अपने दामाद के खिलाफ बेटी को घर से विदा कराकर ले जाने के बाद उसकी बेटी को कार में जिंदा जलाकर मार देने का आरोप लगाया है। इस मामले में उसने अपने दामाद के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई है। उसका आरोप है कि दहेज की मांग पूरी न होने पर उसके दामाद ने यह जघन्य कृत्य किया है।

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पृथ्वीपुर गांव निवासी गुरूपाल ने बताया कि 15 दिसंबर 2020 को उसने अपनी बेटी नीरज की शादी आगरा के दयालबाग निवासी लवकेश यादव के साथ की थी। शादी में लगभग 10 लाख रुपए का दानदहेज दिया गया था, लेकिन ससुरालीजन इतने से संतुष्ट नहीं थे। वह लोग दो तोला सोने की जंजीर और बुलेट बाइक की मांग कर रहे थे। 12 अप्रैल को उसका दामाद अपने मामा के लड़के के साथ उसके घर पहुंचा और बेटी की विदा कराने की बात कही। उन्होंने बेटी की विदा के साथ ही दामाद को सोने की जंजीर देकर विदा कर दिया। शाम करीब पांच बजे वह लोग घर से चले गए। देर रात उन्हें सूचना दी गई कि टूंडला के पास कार का एक्सीडेंट हो गया है और उसमें आग लग गई है। आग में उसकी बेटी भी जिंदा जल गई है। यह जानकारी होते ही परिजनों में हड़कंप मच गया था। वह लोग मौके पर पहुंचे और उन्होंने अपने दामाद लवकेश के खिलाफ टूंडला थाने में बेटी को जिंदा जलाकर मार देने की रिपोर्ट दर्ज कराई है।

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उत्पीड़न से परेशान नीरज नहीं जाना चाहती थी ससुराल

दहेज की मांग को लेकर आयेदिन प्रताडि़त करने से आजिज आकर नीरज अपने मायके आ गई थी। उसने अपने मायके वालों को बताया था कि यदि उनके ससुरालीजनों की मांग पूरी नहीं की गई, तो वह लोग उसे छोड़कर दूसरी शादी कर लेने की धमकी दी रहे हैं और उसे मार देने की धमकी दे रहे हैं। नीरज के पिता ने बताया कि उसकी बेटी ससुराल नहीं जाना चाहती थी, लेकिन उन्होंने किसी तरह सोने की जंजीर की व्यवस्था की और अपने दामाद को दो तोला की चेन भेंट दी। बेटी को भी परिजनों ने काफी समझाया और कहा कि उनकी मांग के अनुसार उन्हें सोने की चेन दी जा रही है। अब वह तुम्हें परेशान नहीं करेगा। मोहल्ले के लोगों ने भी उसके दामाद को काफी समझाया था। इसके बाद डरी-सहमी नीरज ससुराल जाने को तैयार हुई थी।ग्रामीणों की मानें तो नीरज की 15 दिसंबर को बारात आई थी। बारात के दौरान दहेज की मांग को लेकर नीरज के परिजनों और दूल्हे के पिता के साथ काफी विवाह भी हुआ था। उस समय तो किसी तरह विदा हो गई थी।

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