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Sunday, September 25, 2022

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चोर की आत्मा दस महीने बाद जागी, आश्रम का लौटाया समान

जैतनपुर /सीतापुर: भारत भूमि हमेशा से देवभूमि के साथ साथ रहस्यों और चमत्कारों की भूमि जानी जाती रही है इसी कड़ी मे 7 सितंबर 2021 को कबीर भारती आश्रम जैतनपुर कमलापुर जनपद सीतापुर मे एक अजीबोगरीब घटना घटी जिसको जानकर हम सब यह कहने मे बिलकुल गुरेज़ नहीं करेंगे कि यह साधारण घटना नहीं है बल्कि कुछ लोग इसे दैवीय प्रभाव या चमत्कार कहने मे भी पीछे नहीं रहेंगे।

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जी हाँ आपको बताते चलें कि विगत वर्ष 2 दिसंबर 2020 को रात मे आश्रम का ताला तोड़कर चोरों ने वहाँ रखे सत्संग मे प्रयोग होने वाले सभी समान जैसे साउण्ड मशीन , साउण्ड बॉक्स , माइक , पंखे , धर्मग्रंथों आदि समान की चोरी कर ली थी, चोरी की घटना की सूचना पुलिस को दी गयी पुलिस द्वारा लगभग तीन महीने गहन छानबीन की, कई लोगों को पकड़ कर पूछताछ की गयी, आश्रम के आसपास के गाँव मे भी इस चोरी की काफी चर्चा रही लेकिन चोरी का खुलासा नहीं हो पाया ? आश्रम प्रबंधन ने भी यह मान लिया था कि अब इसमे कुछ होने वाला नहीं और इसका निर्णय ऊपर वाले पर छोडकर शांत रहना ही ठीक है ।

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अचानक ! एक दिन (7 सितंबर 2021 दिन गुरुवार) की शाम लगभग शाम पाँच बजे गाँव का ही एक पढ़ा लिखा नवयुवक मुदित एक अन्य साथी रामचंदर के साथ आश्रम मे प्रवेश करता है चेहरे से बहुत परेशान और डरा हुआ लग रहा था उसके हावभाव मे बेचैनी साफ झलक रही थी. आते ही मुदित आश्रम के साधक आचार्य प्रमिल द्विवेदी के पैरों पर गिर गया और रोते हुए कहने लगा कि मुझसे बहुत बड़ा पाप हुआ है , मैंने आश्रम मे चोरी कि थी , जबसे चोरी की है तबसे मैं मानसिक रूप से विक्षिप्त रहने लगा हूँ, अभी हाल ही मे मेरे पिता की अचानक मृत्यु भी हो गयी है मुझे डर लग रहा है कि कहीं मै भी न मर जाऊँ मुझे बचा लीजिये, मै चोरी किया हुआ सारा समान वापस करना चाहता हूँ तभी शायद मै चैन से रह सकूँगा ।

साधक आचार्य प्रमिल द्विवेदी ने उसे उठाकर गले लगते हुए आश्वासन दिया कि परेशान न हो , तुमने बहुत बहादुरी का काम किया है एक जाग्रत आध्यात्मिक चेतना वाला व्यक्ति ही की गयी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना , ऐसी हिम्मत और साहस कर सकता है , तुम समाज के लिए एक प्रेरणा हो। सुबह का भटका हुआ यदि शाम तक वापस आ जाए तो उसे भटका हुआ नहीं कहते, अपना अपराध स्वीकार कर सबके सामने पश्चाताप करना बहुत बड़ा गुण है तुम्हारे जैसे युवकों का सम्मान होना चाहिए जिससे दूसरे भटके हुए युवकों को प्रेरणा मिले और वह भी समाज मे सही रास्ता अपना सकें।

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इस घटना ने आश्रम के आसपास रहने वालों को एक गहरा संदेश दिया है, सत्संग का प्रभाव तो सर्वविदित है हमारे शास्त्रों ने भी कहा है कि “सत्संगति मुद मंगल मूला….” कबीर भारती आश्रम सबके कल्याण और सन्मार्ग पर चलने कि कामना करता है ।

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