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Monday, August 15, 2022

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राजस्थान: मां-बेटी के शव चार-पांच दिन पुराने बंद मकान से मिले, हत्या की आशंका

पाली। बगड़ी नगर थाना क्षेत्र के कंटालिया गांव में एक बंद मकान में मां-बेटी के शव मिले है। मकान पर बाहर से ताला लगा हुआ था। भीतर से बदबू आने पर ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। घर के अंदर मां-बेटी के शव पुलिस के अलग-अलग पड़े मिले। शव करीब चार-पांच पुराने लग रहे थे। पुलिस की प्रारंभिक जांच में हत्या की आशंका जताई जा रही हैं। एफएसएल टीम सोमवार को मौके पर पहुंचेगी, उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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सोजत सीओ डॉ हेमंत जाखड़ ने बताया कि रविवार देर शाम कंटालिया के कुछ ग्रामीणों ने बगड़ी नगर थाने में कॉल किया तथा बताया कि कुम्हारों के मोहल्ले में एक बंद मकान से बदबू आ रही हैं। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची।

ताला तोड़ अंदर देखा तो रसोई में 77 वर्षीय अमरतीदेवी पत्नी खीवाराम प्रजापत तथा कमरे में मृतका की 40 वर्षीय दिव्यांग बेटी ऊकिया देवी उर्फ उकड़ी देवी पत्नी मंगलाराम प्रजापत का शव पड़ा मिला। मौके पर पुलिस को फर्श पर खून से सने पैरों के निशान मिले हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में मां-बेटी की हत्या आशंका जताई जा रही हैं। मृतका ऊकियादेवी पिछले कुछ समय से पीहर में ही रह रही थी।

मृतका और उसकी बेटी दाेनाें अकेले रहते थे। वृद्धा का गाेदपुत्र रमेश कुमार प्रजापत व्यापार के सिलसिले में बेंगलुरू में रहता है। मृतका का मकान गांव के मुख्य मार्ग पर हाेने के बाद भी दाेनाें के बारे में किसी ने पता नहीं किया। रविवार रात बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस काे बुलाया।

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साेजत से डीएसपी डाॅ. हेमंत जाखड़ पुलिस दल के साथ माैके पर पहुंचे। शव सड़े-गले हाेने के साथ ही देर रात हाेने के कारण मकान में रखे हैं। डीएसपी का कहना है कि एफएसएल टीम के आने तथा मेडिकल बाेर्ड से पोस्टमार्टम के बाद ही मौत के कारणों का पता चल सकेगा। देर रात एएसपी विपिन शर्मा ने भी कंटालिया पहुंचकर मामले की जानकारी ली।

जिस स्थान पर यह घटना हुई है वह मुख्य बाजार हाेने से व्यस्त रहता है। आस-पास बस्ती में मृतका के समाज के मकान भी हैं। 30 नवंबर काे दाेनाें काे आखिरी बार एक सामाजिक कार्यक्रम में देखा गया था। पड़ाेस में रहने वाले लाेगाें ने भी इन दाेनाें को 4-5 दिनाें से नहीं देखा था, ऐसे में उनके घर जाकर पता करने का भी किसी ने प्रयास नहीं किया। मकान के दाे दरवाजे हैं। इसमें एक दरवाजे पर ताला था। दूसरे की कुंडी अंदर से बंद थी। पुलिस इसकाे लेकर भी हैरत में है। अधिकारियों का कहना है कि अक्सर महिलाएं एक ही मकान में बंद नहीं रहती हैं। गांवाें में ताे यह कल्चर भी है कि दिन में वक्त मिलने पर वे एक-दूसरे के घर जाकर बतियाती भी हैं। ऐसे में किसी काे दाेनाें के बारे में 4-5 दिन तक पता नहीं चलना, सवाल खड़े कर रहा है।

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बताया जाता है कि रुकिया की शादी पड़ाेस के गांव सवराड़ में ही हाे रखी है। उसके भी काेई संतान नहीं है। वह दाे साल से मां के घर पर ही रहती थी। करीब 3 वर्ष पहले रावण का मेला देखने के लिए गई थी। वहां बस से गिरने के कारण पैर में चाेट आई थी। मवाद पड़ने के बाद उसका पैर काटना पड़ा था।

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