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Sunday, December 4, 2022

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खुलकर उतरा संयुक्त किसान मोर्चा भाजपा के खिलाफ

संयुक्त किसान मोर्चा के फायर ब्रांड नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि भाजपा वेस्ट यूपी में फिर से हिंदू मुसलमान और जिन्ना का मैच चुनाव में खेलना चाहती है, मगर इस बार यहां की जनता उनको इस तरह का मैच नहीं खेलने देगी।

गुरुवार को मेरठ में आयोजित संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति की महत्वपूर्ण बैठक के बाद प्रेस वार्ता में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि विधानसभा चुनाव में किसान विरोधी भाजपा को सजा भुगतनी पड़ेगी।

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टिकैत ने कहा, देश के प्रधानमंत्री जी ने आंदोलन में शहीद किसानों का नाम तक नही लिया। आज तक प्रधानमंत्री जी ने आंदोलन में जान गवाने वाले किसानों को शहीद कहने से परहेज किया, इनके प्रत्याशियों से किसानों को सवाल करना चाहिए।

टिकैत ने कहा, विधानसभा चुनाव के लिए वोट मांगने आने वालों से पूछा जाएगा कि उन्होंने किसानों के लिए क्या किया। उत्तर प्रदेश में यह सवाल सभी राजनीतिक दलों से होगा। बीकेयू नेता ने कहा कि हम मतदाताओं को ऐसा फॉर्म देंगे जिसमें सवाल होंगे। यह पर्चे उत्तराखंड के लोगों को भी बांटे जाएंगे। वोट मांगने आए सभी लोगों से उन सवालों के जवाब लिए जाएंगे। इन जवाबों के आधार पर मतदाता खुद तय करेगा कि किसे वोट देना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री 14 दिन में गन्ना भुगतान की बात करते हैं लेकिन उत्तर प्रदेश में गन्ना भुगतान 13 महीने में मिलता है।

किसान नेता डॉ. दर्शन पाल ने मांगों को लेकर in तेज करने का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि छोटी-छोटी बैठकें की जाएंगी और सरकार की गलत नीतियों के बारे में लोगों को बताया जाएगा। लखीमपुर खीरी मामले को भी उठाया जाएगा।

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संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से जारी अपील में कहा गया है कि योगी सरकार ने लखीमपुर खीरी कांड के हत्यारों को पकड़ने के बजाय उन्हें बचाने का प्रयास किया। सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई तब जाकर मंत्री के बेटे को पकड़ा गया। कोर्ट की जांच साफ कहती है कि इस कांड के पीछे षडयंत्र था, लेकिन असली षडयंत्रकारी अब भी खुल घूम रहा है। अपील में कहा गया है, “भाजपा को चुनाव में मंत्री अजय मिश्र टेनी की जरूरत है। इनके लिए किसानों की हत्या से ज्यादा बड़ा सवाल वोट का है।”

अपील में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार 2017 में किए गए अपने वादों से पलट गई है। पार्टी ने वादा किया था कि सभी किसानों का सारा लोन माफ होगा, लेकिन हुआ सिर्फ 44 लाख किसानों का और वह भी सिर्फ एक लाख रुपये तक का कर्ज। गन्ने का भुगतान 14 दिनों में दिलाने, पर्याप्त और सस्ती बिजली दिलवाने, फसल का दाना-दाना खरीदने के वादे किए गए थे, लेकिन कोई पूरा नहीं हुआ। इसलिए भाजपा का जो भी नेता वोट मांगने आए उससे इन मुद्दों पर सवाल जरूर पूछें।

अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मुल्ला के अनुसार उत्तर प्रदेश में 57 संगठनों में भाजपा को सजा देने पर सहमति बनी। उत्तर प्रदेश में वोटर के नाम पत्र जारी करेंगे। सभी मिलकर पर्चे के आधार पर मोर्चा की बात लोगों तक पहुचाएंगे। उत्तर प्रदेश के संगठनों की मदद देश भर के किसान नेता करेंगे।

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भारतीय किसान यूनियन उगराहां के जोगेंद्र सिंह उगराहां ने कहा कि सयुक्त किसान मोर्चा का पंजाब में चुनाव लड़ने वाले संयुक्त समाज मोर्चा के साथ कोई रिश्ता नहीं है। कोई भी राजनैतिक व्यक्ति या दल मोर्चा का हिस्सा नहीं है। पंजाब के किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा तो सुरक्षा है, लेकिन 26 जनवरी को एक महिला के साथ जो घटना घटी है उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है।

जय किसान आंदोलन के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि बजट में किसानों से बदला किया गया। किसानों के साथ न्यूनतम ईमानदारी भी सरकार ने नहीं दिखाई। किसानों को सरकार से दोगुनी आय, कृषि बजट बढ़ाने, न्यूनतम समर्थन मूल्य का दायरा बढ़ाने की उम्मीद थी लेकिन सभी योजनाओं में कमी की गई है। अगर आंदोलनकारियों से दिक्कत है तो सरकार उन्हें जेल भेज दे लेकिन किसानों से बदला न ले।

राकेश टिकैत ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा इसी तरह की प्रेस वार्ता उत्तर प्रदेश के मेरठ, झांसी, गोरखपुर, कानपुर, सिद्धार्थनगर, लखनऊ, बनारस, मुरादाबाद, इलाहाबाद में करेगा और लोगों से अपील करेगा।

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