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Thursday, December 1, 2022

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जाने क्या है नाटो ? यूक्रेन रूसी कब्जे के बाद आया एक्शन में, नाटो सदस्यता के लिए आधिकारिक तौर पर किया अप्लाई

रूस द्वारा कई क्षेत्रों को कब्जाने के बाद यूक्रेन ने आधिकारिक तौर पर नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) सदस्यता के लिए आवेदन किया है। यूक्रेनी मीडिया ने शुक्रवार को ये जानकारी दी। यूक्रेन ने ये कदम ऐसे समय में उठाया है जब पुतिन ने यूक्रेन के बड़े क्षेत्र को रूस में मिलाने की संधियों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय कानूनों को दरकिनार कर यूक्रेन के चार हिस्सों को रूस में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को संधियों पर हस्ताक्षर किए। पुतिन के इस कदम के तुरंत बाद यूक्रेन ने घोषणा की कि उसने आधिकारिक तौर पर NATO सदस्यता के लिए अप्लाई किया है। 

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा कि उनका देश नाटो सैन्य गठबंधन में शामिल होने के लिए “त्वरित” आवेदन प्रस्तुत कर रहा है। जेलेंस्की ने कहा, “हम नाटो में तुरंत शामिल होने के लिए यूक्रेन के आवेदन पर हस्ताक्षर करके अपना निर्णायक कदम उठा रहे हैं।” हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि “त्वरित” आवेदन का क्या मतलब है, क्योंकि नाटो में शामिल होने के लिए इसके सभी सदस्य देशों के सर्वसम्मत समर्थन की आवश्यकता होती है।

जेलेंस्की ने कहा, “असल में, हम पहले ही नाटो गठबंधन के मानकों को पूरा कर रहे हैं और खुद की संगतता साबित कर चुके हैं। वे यूक्रेन के लिए जरूरी हैं। हम एक दूसरे पर भरोसा करते हैं, हम एक दूसरे की मदद करते हैं, और हम एक दूसरे की रक्षा करते हैं। यही गठबंधन कहलाता है।” बता दें कि रूस द्वारा सात महीने पहले किए गए हमले के बाद से यूक्रेन ने सोवियत युग की हथियार प्रणालियों को त्याग कर नाटो-मानक हथियारों का इस्तेमाल किया है।  

यूक्रेन के कई इलाकों का रूस में विलय, व्लादिमीर पुतिन ने नियुक्त किए राज्यों में प्रमुख

इसी साल जून 2022 में तीन देशों ने औपचारिक रूप से नाटो में शामिल होने की अपनी आकांक्षाओं के बारे में सूचित किया था। इन देशों में बोस्निया और हर्जेगोविना, जॉर्जिया व यूक्रेन शामिल है। यूक्रेन ने अब आधिकारिक तौर पर इसके लिए आवेदन कर दिया है। इसके बाद जुलाई 2022 में, नाटो ने फिनलैंड और स्वीडन को संगठन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। इन दोनों देशों के लिए समर्थन प्रक्रिया फिलहाल जारी है। 

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन यानी NATO क्या है? 

बता दें कि नाटो 30 पश्चिमी देशों का एक सैन्य गठबंधन है। इसमें शामिल प्रमुख देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस भी हैं। नाटो का मुख्य लक्ष्य सुरक्षा नीति पर काम करना और अगर किसी नाटो देश पर कोई अन्य देश हमला करता है तो नाटो में शामिल सभी देश उस देश के पक्ष में खड़े हो सकते है। ऐसे में अगर यूक्रेन को नाटो सदस्यता मिल जाती है तो रूस का मुकाबला केवल यूक्रेन से ही नहीं बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों के साथ होगा जो पहले से ही यूक्रेन को हथियार मुहैया करा रहे हैं।

1949 में, गठबंधन के 12 संस्थापक सदस्य थे, जिनमें बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, इटली, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। अब अन्य सदस्य देश हैं: ग्रीस और तुर्किये (1952), जर्मनी (1955), स्पेन (1982), चेक गणराज्य, हंगरी और पोलैंड (1999), बुल्गारिया, एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया, रोमानिया, स्लोवाकिया और स्लोवेनिया (2004) , अल्बानिया और क्रोएशिया (2009), मोंटेनेग्रो (2017) और उत्तर मैसेडोनिया (2020)।

यूक्रेन के क्षेत्रों के विलय संबंधी संधियों पर पुतिन ने किए हस्ताक्षर

इससे पहले क्रेमलिन के सेंट जॉर्ज हॉल में पुतिन और यूक्रेन के चार क्षेत्रों के प्रमुखों ने उनके रूस में शामिल होने संबंधी संधि के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। इससे यूक्रेन में सात महीने से चल रहे युद्ध के और तेज होने की आशंका है। रूस द्वारा यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों को अपने में मिलाने के लिये किए गए “जनमत संग्रह” के तीन दिनों बाद इस समारोह का आयोजन हो रहा है। यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने इसे सीधे-सीधे जमीन कब्जाना करार देते हुए कहा कि यह बंदूक के बल पर अंजाम दी गई झूठी कवायद है।

पूर्वी यूक्रेन के अलगाववादी दोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्र को 2014 में आजादी की घोषणा के बाद से ही रूस का समर्थन मिला था। यूक्रेन के क्रीमिया प्रायद्वीप के विलय के कुछ हफ्तों बाद ही रूस ने यह कदम उठाया था। यूक्रेन में 24 फरवरी को रूसी सैनिकों के हमले के कुछ दिनों बाद ही दक्षिणी खेरसान क्षेत्र और पड़ोसी जापोरिज्जिया के कुछ क्षेत्रों पर रूस ने कब्जा कर लिया था। क्रेमलिन-नियंत्रित रूसी संसद के दोनों सदनों की अगले सप्ताह बैठक होगी जिसमें इन क्षेत्रों को रूस में शामिल किए जाने के लिए संधियों पर मुहर लगाई जाएगी और उन्हें उनकी मंजूरी के लिए पुतिन के पास भेजा जाएगा।

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