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Monday, November 28, 2022

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बाजवा के खास, पुराना विवाद इमरान से, पाकिस्तान के सियासी हालात नए सेना प्रमुख के बाद कितने बदलेंगे?

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने ले. जनरल आसिम मुनीर को पाकिस्तान का नया सेना प्रमुख नियुक्त किया है। इसके साथ ही नए सेना प्रमुख को लेकर कई दिनों से चल रहा अटकलों का दौर मंगलवार को समाप्त हो गया। पाकिस्तान की सूचना मंत्री मरियम औरंगजेब ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी। मुनीर मौजूदा सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा की जगह लेंगे।

आसिम मुनीर कौन हैं?
पाकिस्तानी अखबार डॉन देवशेर ने कहा, ‘पुलवामा हमला उस वक्त हुआ था जब लेफ्टिनेंट जनरल मुनीर ISI के चीफ थे। हमले से चंद महीने पहले ही उन्होंने पद संभाला था। मुनीर इस इलाके से बहुत परिचित हैं।’ ऐसे में मुनीर के पाकिस्तानी सेना का प्रमुख बनने के बाद भारत से रिश्तों में किसी खास बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती है। के मुताबिक आसिम मुनीर ऑफिसर ट्रेनिंग प्रोग्राम के जरिए सेना में आए थे। जहां उनकी नियुक्ति फ्रंटियर फोर्स रेजीमेंट में हुई थी। मौजूदा सेना प्रमुख जनरल बाजवा के खास लोगों में शामिल लेफ्टिनेंट जनरल मुनीर को 2017 के शुरुआत में मिलिट्री इंटेलिजेंस डायरेक्टर जनरल बनाया गया। 

अक्तूबर 2018 में मुनीर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के चीफ बना दिए गए। उनके नाम सबसे कम समय तक इस पद पर रहने का रिकॉर्ड है। कहा जाता है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान के दबाव में उन्हें महज आठ महीने बाद ही पद छोड़ना पड़ा था। इसके बाद लेफ्टिनेंट मुनीर दो साल तक गुंजरावाला कॉर्प्स कमांडर के पद पर तैनात रहे। यहां से उन्हें सेना प्रमुख के मुख्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया। जहां वह क्वार्टरमास्टर जनरल रहे। 

लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मुनीर पाकिस्तान के तेजतर्रार और साफ कहने वाले अधिकारियों में गिने जाते हैं। हालांकि, कुछ तकनीकी कारणों से उन्हें सेना प्रमुख की दौड़ में शामिल बड़े दावेदारों में नहीं गिना जा रहा था। उनकी नियुक्ति के बाद पाकिस्तानी मीडिया उन्हें डार्क हॉर्स कह रही है। मुनीर के करियर के बात करें तो सितंबर 2018 में उन्हें पदोन्नत करके लेफ्टिनेंट जनरल बनाया गया था। इसी महीने 27 नवंबर को उनका कार्यकाल रिटायरमेंट के साथ ही समाप्त हो रहा था।  
मुनीर की निगरानी में हुआ था पुलवामा हमला 
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (एनएसएबी) के सदस्य और कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव के रूप में सेवानिवृत्त हुए तिलक देवशेर ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि मुनीर पाकिस्तान में उन लोगों में  शामिल थे, जिन्होंने 2019 के पुलवामा आतंकी हमले की निगरानी की थी।

देवशेर ने कहा, ‘पुलवामा हमला उस वक्त हुआ था जब लेफ्टिनेंट जनरल मुनीर ISI के चीफ थे। हमले से चंद महीने पहले ही उन्होंने पद संभाला था। मुनीर इस इलाके से बहुत परिचित हैं।’ ऐसे में मुनीर के पाकिस्तानी सेना का प्रमुख बनने के बाद भारत से रिश्तों में किसी खास बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती है। 

ISI चीफ के पद से महज आठ महीने में ही क्यों हटा दिए गए थे मुनीर?
एक पाकिस्तानी पत्रकार ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल मुनीर की छवि सुलझे हुए और स्ट्रेट फारवर्ड सैन्य अधिकारियों की है। 2018 में जब उन्हें ISI का डीजी बनाया गया तो उनके पास भ्रष्टाचार से जुड़ी कुछ जानकारियां आईं। इन मामलों में इमरान खान के परिवार से जुड़े लोगों की संलिप्तता का पता चला। कहा जाता है कि जब तत्कालीन ISI डीजी मुनीर ने इसकी जानकारी इमरान खान को दी तो इमरान उनसे खफा हो गए। इसके बाद ही इमरान खान ने सेना प्रमुख पर मुनीर को हटाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इमरान का दबाव के चलते उन्हें पद से हटा दिया गया। इसके बाद जहां उनकी नियुक्ति की गई उसे एक तरह से सजा के तौर पर की गई नियुक्ति माना गया।  

मुनीर को सेना प्रमुख बनाए जाने के पीछे क्या वजह है? 
पाकिस्तानी पत्रकार कहते हैं कि मुनीर तीन दिन बाद रिटायर होने वाले थे। इससे ऐन पहले उन्हें सेना प्रमुख जैसी जिम्मेदारी दे दी गई। अब कम से कम तीन साल वह देश के सबसे ताकतवर पद पर बने रहेंगे। इसके बाद भी उनका कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है।
शहबाज शरीफ सरकार को उम्मीद होगी की इस नियुक्ति की वजह से सेना प्रमुख का उनकी सरकार की ओर झुकाव रहेगा। हालांकि, पाकिस्तान का राजनीतिक इतिहास बताता है कि ऐसा हो यह जरूरी नहीं है। पहले भी कई बार इस तरह की निुयक्ति के बाद सरकार की उम्मीद के उलट सेना प्रमुख का रुख रहा है। उदाहरण के लिए 1976 में कई दावेदारों को दरकिनार करके जनरल जिया उल हक की नियुक्ति तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो ने की थी। बाद में उन्हीं जिया उल हक ने भुट्टो का तख्तापटल कर दिया। 

नवाज शरीफ के साथ तो ऐसा एक नहीं दो-दो बार हुआ है। जिन परवेज मुशर्रफ को उन्होंने कई दावेदारों को नजरअंदाज करके सेना प्रमुख बनाया उन्होंने ही उनका तख्तापटल कर दिया। इसी तरह कमर जावेद बाजवा के मामले में भी नवाज के अनुभव अच्छे नहीं रहे और उन्हें देश के बाहर जाना पड़ा।  

नए सेना प्रमुख के आने के बाद पाकिस्तान की राजनीति में क्या बदलाव हो सकते हैं? 
पाकिस्तानी पत्रकार कहते हैं कि इस बदलाव से पाकिस्तान की राजनीति में कोई बड़ा सुधार या बदलाव होने जा रहा है इसकी उम्मीद नहीं करनी चाहिए। ये जरूर है कि इमरान खान के लिए बाजवा के जाने के बाद बहुत कुछ नहीं बदलता दिख रहा है। इमरान की वजह से ही मुनीर को ISI चीफ का पद छोड़ना पड़ा था। मुनीर के मन में ये टीस भी जरूर रहेगी।  इमरान और उनकी पार्टी ने जिस तरह के हमले जनरल बाजवा पर किए हैं अगर वो जारी रहते हैं तो ये रिश्ते और खराब हो सकते हैं। 

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