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Friday, January 27, 2023

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नेपाल के प्रधानमंत्री दहल की मुश्किल, बनने को तैयार नहीं सीनियर नेता मंत्री !

नेपाल के नए प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल के लिए अपने मंत्रिमंडल का विस्तार एक बड़ी समस्या बन गई है। सरकार बनाने की जल्दी में उन्होंने राजनीति में नए उभरे युवा नेता रवि लमिछाने को उप प्रधानमंत्री बना दिया। सत्ताधारी गठबंधन में शामिल पार्टियों के वरिष्ठ नेता इससे आहत हुए हैं। खबर है कि दहल ने उन नेताओं के सामने मंत्री बनने का प्रस्ताव रखा है, जिसे अब तक उन्होंने स्वीकार नहीं किया है।

बीते सोमवार को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के अध्यक्ष दहल ने सात और अन्य मंत्रियों के साथ शपथ ली थी। उनमें चार मंत्री पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) से लिए गए, जो सत्ताधारी गठबंधन में सबसे बड़ा दल है। उनके अलावा माओइस्ट सेंटर, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी और जनमत पार्टी के एक-एक नेता को मंत्री बनाया गया। पूर्व टीवी स्टार रवि लमिछाने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता हैं। उन्होंने लगभग छह महीने पहले ही इस पार्टी का गठन किया था।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन में उभरे मतभेद इतने गहरे हैं कि प्रधानमंत्री दहल के लिए शपथ ले चुके मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा भी टेढ़ी खीर साबित हुआ है। मंत्रिमंडल में चार मंत्रियों को अभी तक कोई विभाग नहीं दिया गया है। दहल ने लमिछाने के अलावा दो और उप प्रधानमंत्री बनाए हैँ। ये हैं- यूएमएल के विष्णु पौडेल और माओइस्ट सेंटर के नारायण काजी श्रेष्ठ।

प्रधानमंत्री के निजी सचिव रमेश मल्ला ने स्वीकार किया है कि मंत्रिमंडल के गठन में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘गठबंधन के शामिल दलों के साथ विभाग बंटवारे और मंत्रियों की नियुक्ति को लेकर चल रही बातचीत अभी किसी नतीजे तक नहीं पहुंची है। इसमें अभी और वक्त लगेगा।’ उधर यूएमएल के उप महासचिव प्रदीप गयावली ने कहा है कि सरकार को समर्थन दे रहे दलों के अध्यक्षों को लेकर एक समिति बनाने का प्रयास चल रहा है, ताकि सभी दलों का समर्थन सरकार को मिलता रहे। उन्होंने कहा- ‘यही समिति सभी संवैधानिक पदों के लिए नाम तय करेगी। इस बारे में जल्द ही बातचीत होगी।’

काठमांडू पोस्ट के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दलों के कई वरिष्ठ नेता लमिछाने को उप प्रधानमंत्री बनाए जाने के कारण मंत्री बनने को लेकर अनिच्छुक हो गए हैं। उन्हें इस बात पर भी एतराज है कि लमिछाने को उप प्रधानमंत्री के साथ-साथ गृह मंत्रालय जैसा महत्त्वपूर्ण विभाग भी दिया गया है। जिन नेताओं ने मंत्री बनने से इनकार किया है, उनमें माओइस्ट सेंटर के उप महासचिव बरशामन पुन भी हैं। जबकि पुन ने इस बार माओइस्ट सेंटर और यूएमएल को एक मंच पर लाने की बातचीत में सबसे अहम भूमिका निभाई थी।

पुन के प्रेस कॉ-ऑर्डिनेटर दयानिधि भट्ट ने काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘पुन ने सरकार से अलग रहने का फैसला किया है। वे तीन बार मंत्री रह चुके हैं। एक इतना वरिष्ठ नेता अपने जूनियर्स के नीचे कैसे काम कर सकता है।’ बताया जाता है कि पार्टी के एक अन्य उप महासचिव शक्ति बसनेत भी मंत्री बनने को लेकर अनिच्छुक हैं। बसनेत पहले गृह मंत्री रह चुके हैं। तय हुए फॉर्मूले के मुताबिक यूएमएल को दस और माओइस्ट सेंटर को सात मंत्री पद मिलने हैं। बाकी मंत्री पद गठबंधन में शामिल दूसरे दलों को मिलेंगे।

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