प्रशासन की कार्यशैली और आरोपों की जांच पर उठाए सवाल, राजनीतिक ध्रुवीकरण को बताया असली समस्या से भटकाव
मुंबई: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे में 20 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे द्वारा 18 सितंबर को फांसी लगाकर आत्महत्या करने के मामले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस संवेदनशील और दुखद घटना को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने हर दुखद घटना और मौत को जाति एवं धर्म के चश्मे से देखने की बढ़ती सामाजिक व राजनीतिक प्रवृत्ति की कड़े शब्दों में निंदा की है। राज ठाकरे ने आगाह किया कि इस प्रकार का गैर-जरूरी सामाजिक ध्रुवीकरण देश की शिक्षा व्यवस्था की मूलभूत और गहरी समस्याओं से सबका ध्यान भटकाता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए राज ठाकरे ने संस्थान की कार्यशैली और पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए। उन्होंने उल्लेख किया कि घटना के शुरुआती दौर में आईआईटी प्रशासन ने छात्र पर परीक्षा के दौरान कथित रूप से मोबाइल फोन और चैटजीपीटी (ChatGPT) का उपयोग करने का आरोप मढ़ दिया था। हालांकि, बाद में आंतरिक जांच पूरी होने से पहले जल्दबाजी में ऐसे आरोप सार्वजनिक करने को लेकर प्रशासन ने अपनी गलती मानी और औपचारिक रूप से माफी भी मांगी।
दूसरी ओर, मृतक छात्र के परिवार ने संस्थान में जातिगत भेदभाव और प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाया है, जिसके आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और संबंधित प्रोफेसरों ने भी अपना पक्ष रखा है। राज ठाकरे ने अफसोस जताते हुए कहा कि इन सभी परस्पर विरोधी आरोपों, बयानों और राजनीति के बीच एक होनहार नौजवान ने अपनी जान गंवा दी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कोई भी इस मूल बात पर गंभीरता से चर्चा क्यों नहीं कर रहा है कि एक मेधावी छात्र को इतना आत्मघाती कदम उठाने के लिए किन मानसिक और व्यवस्थागत परिस्थितियों ने मजबूर किया।

