1 अक्तूबर से लागू रहेगा फैसला, सुरक्षा समीक्षा के बाद लिया निर्णय; मणिपुर के 13 पुलिस थाना क्षेत्र दायरे से बाहर
केंद्र सरकार ने सुरक्षा स्थिति की व्यापक समीक्षा के बाद पूर्वोत्तर के तीन राज्यों—मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के चुनिंदा संवेदनशील इलाकों में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम यानी अफस्पा (AFSPA) की मियाद को अगले छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक गजट अधिसूचना के अनुसार, यह विस्तार 1 अक्तूबर से प्रभावी होगा और अगले छह महीने की अवधि तक लागू रहेगा। हालांकि, अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि जमीनी हालात में तेजी से सुधार होता है, तो सरकार स्थिति का पुनः आकलन कर इस अवधि के समाप्त होने से पहले भी अधिनियम को वापस लेने पर विचार कर सकती है।
गृह मंत्रालय ने कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा की समग्र परिस्थितियों का विस्तृत विश्लेषण करने के बाद अफस्पा की धारा-3 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए इन चिन्हित क्षेत्रों को औपचारिक रूप से ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किया है। सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में उग्रवादी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से सुरक्षा बलों को अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं, ताकि वे किसी भी अवांछित स्थिति से त्वरित रूप से निपट सकें।
मणिपुर के संदर्भ में गृह मंत्रालय ने यद्यपि राज्य के बड़े भूभाग को अशांत क्षेत्र घोषित किया है, लेकिन घाटी के पांच प्रमुख जिलों में स्थित 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को इस कड़े कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। अधिसूचना के अनुसार, इंफाल पश्चिम जिले के इंफाल, लांफेल, सिटी, सिंगजामेई, पटसोई और वांगोई पुलिस थाना क्षेत्र अफस्पा मुक्त रहेंगे। इसके अलावा, इंफाल पूर्व के पोरोमपत, हेइंगांग और इरिलबुंग थाना क्षेत्र, थौबल जिले का थौबल थाना, बिष्णुपुर जिले के बिष्णुपुर व नंबोल थाने तथा काकचिंग जिले का काकचिंग थाना क्षेत्र भी इस अधिसूचना के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त रहेगा।

