दोनों तरफ इंजन लगने से मिलेगी 12,000 हॉर्सपावर की ताकत, अलग से पावर कार लगाने की जरूरत होगी खत्म
नई दिल्ली: भारतीय रेलवे देश में सामान्य यात्री ट्रेनों के सफर को अधिक सुगम, शांत और हाई-स्पीड बनाने के लिए एक व्यापक तकनीकी अपग्रेडेशन की तैयारी में जुटा है। इसके अंतर्गत रेलवे 6,000 हॉर्सपावर (एचपी) क्षमता वाले आधुनिक और ऊर्जा की बचत करने वाले नए इंजनों की खरीद करने जा रहा है। ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित रखने वाले ये अत्याधुनिक लोकोमोटिव ट्रेनों के आगे और पीछे दोनों तरफ लगाए जाएंगे, जिससे ट्रेन को ‘पुश-पुल’ तकनीक के तहत संचालित किया जा सकेगा।
12,000 एचपी की ताकत और तेज गति पुश-पुल प्रणाली में ट्रेन के दोनों छोर पर लगे 6,000 एचपी के इंजन मिलकर कुल 12,000 हॉर्सपावर की शक्ति उत्पन्न करेंगे। इससे ट्रेनों की एक्सलरेशन क्षमता यानी गति पकड़ने और ब्रेक लगाने के बाद तुरंत तेज होने की क्षमता में भारी सुधार होगा। उच्च गति के लिए उन्नत किए गए रेलवे ट्रैक्स पर इन इंजनों की बदौलत ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से दौड़ सकेंगी। वर्तमान में अधिकांश सामान्य यात्री गाड़ियों में 5,000 से 6,000 हॉर्सपावर के पारंपरिक इंजनों का ही उपयोग किया जा रहा है।
पावर जनरेटर कार की नहीं पड़ेगी जरूरत, कोचों को सीधे मिलेगी बिजली इन नए इंजनों की खरीद और दीर्घकालिक रखरखाव के लिए निजी व सरकारी तकनीकी विशेषज्ञ कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी की जाएगी। नई प्रणाली लागू होने के बाद ट्रेनों में डीजल आधारित अलग पावर जनरेटर कार (ईओजी) लगाने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। इंजन से ही हेड-ऑन-जेनरेशन (एचओजी) प्रणाली के जरिए बोगियों की लाइट, पंखे और एयर कंडीशनिंग (एसी) के लिए निरंतर बिजली की आपूर्ति होगी। इससे न केवल पर्यावरण को होने वाला नुकसान कम होगा, बल्कि यात्रियों को अधिक शांत और आरामदायक यात्रा अनुभव भी मिलेगा।

