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7 मौतें 6 महीने में का क्या है राज? यूक्रेन से जंग के बीच व्लादिमीर पुतिन के एक-एक खत्म हो रहे करीबी

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रूस में अरबपति बिजनेसमैनों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इन मौतों की कड़ी में ताजा नाम जुड़ा है रविल मैगानोव का। रविल मैगानोव रूसी तेल कंपनी लुकोइल के चेयरमैन थे। बीते हफ्ते मॉस्को के अस्पताल की खिड़की से गिरकर उनकी मौत हो गई। हालांकि इसे हादसा बताया जा रहा है, लेकिन यह मौत भी संदेह के घेरे में है। इन सभी अरबपतियों की मौतों में एक खास कनेक्शन है। यह सभी रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन के करीबी थे और यूक्रेन पर उनके हमले की आलोचना कर चुके थे। ऐसे में इस बात का संदेह जताया जा रहा है कि कहीं पुतिन खुद ही तो अपने करीबियों की हत्या नहीं करा रहे। इस साल यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से अब तक 7 ऐसे अरबपतियों की मौत हो चुकी है। आइए डालते हैं एक नजर…

1. एलेक्जेंड ट्यूकालोव
61 वर्षीय ट्यूकालोव गैस की बड़ी कंपनी गजप्रॉम के एग्जीक्यूटिव थे। रूसी मीडिया के मुताबिक वह 25 फरवरी को सेंट पीर्ट्सबर्ग स्थित अपने घर के गैराज में मृत पाए गए। इसकी अगली सुबह ही रूस ने यूक्रेन पर हमला बोला था। हैरानी की बात यह है कि इस मामले में न तो उनकी कंपनी गजप्रॉम और न ही क्षेत्रीय जांच कमेटी की तरफ से कोई बयान जारी किया गया। हालांकि अखबारों में इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन यह जानकारी सामने आई थी कि यहां से कोई भी सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ था। बताया जाता है कि मारने से पहले उन्हें बुरी तरह से पीटा गया था। इसकी वजह से भी उनकी मौत पर संदेह होता है।

2. मिखाइल वॉटफोर्ड
66 साल के वॉटफोर्ड यूक्रेन में जन्मे एक बिजनेसमैन थे। वह भी तेल और गैस से जुड़े बिजनेस में शामिल थे। स्थानीय मीडिया के मुताबिक 28 फरवरी को वह दक्षिणी पूर्व इंग्लैंड में अपने घर में मृत पाए गए। जानकारी के मुताबिक उनका शव फांसी के फंदे से झूलता पाया गया था। हालांकि सरे पुलिस का कहना था कि उनकी कंपनी के अधिकारी मौत को संदेहास्पद नहीं मान रहे थे। फिर भी मामले की जांच की रही है। यह मौत भी यूक्रेन पर हमले के कुछ दिन बाद ही सामने आई थी। बताया जाता है कि वॉटफोर्ड के यूक्रेनी होने के नाते रूसी एजेंसियों पर उनकी नजर थी।

3. व्लादीस्लाव अयायेव
व्लादीस्लाव अयायेव की उम्र 51 साल थी और वह गजप्रॉमबैंक के पूर्व वाइस प्रेसीडेंट थे। 18 अप्रैल को अयायेव का शव उनके ही अपार्टमेंट में उनकी पत्नी और बेटी के साथ पाया गया। स्थानीय समाचार पत्रों के मुताबिक यह सामने आया था कि पत्नी और बेटी को गोली मारने के बाद अयायेव ने फांसी लगा ली थी। अयायेव भी पुतिन के करीबी लोगों में शामिल थे। हैरानी की बात है कि इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी नहीं मिला। 

4. सर्गेई प्रोतोसेन्या
19 अप्रैल को सर्गेई प्रोतोसेन्या स्पेन स्थित अपने विला में अपनी बेटी और पत्नी के साथ मृत पाए गए। 55 वर्षीय सर्गेई रूस की सबसे बड़ी लिक्विड नैचुरल गैस उत्पादक नोवाटेक के शीर्ष मैनेजर थे। यहां पर भी जांच में यही सामने आया कि उन्होंने पत्नी और बेटी को मारने के बाद खुद की जान ली। हालांकि कुछ अखबारों की रिपोर्ट में कहा गया था कि उनके शरीर पर खून का कोई दाग नहीं था। 

5. व्लादीमीर ल्याकिशेव
45 वर्षीय ल्याकिशेव ब्रात्या कारावायेवी रेस्टोरेंट चेन के को-ओनर थे। रूसी मीडिया के मुताबिक जिस बिल्डिंग में वह रहते थे उसकी 16वीं मंजिल की बालकनी पर उनका शव मिला। सूत्रों का दावा है कि ल्याकिशेव के माथे पर गोली लगने का निशान था। उनकी मौत 4 मई को हुई थी।

6. यूरी वोरोनोव
वोरोनोव एस्ट्रा-शिपिंग कंपनी के सीईओ और फाउंडर थे। उनकी कंपनी गजप्रॉम के लिए आर्कटिक कांट्रैक्ट्स पर काम करती थी। वह लेनिनग्राद स्थित कॉटेज के स्विमिंग पूल में मरे हुए पाए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके माथे पर भी गोली का निशान था और पिस्टल पास ही पड़ी हुई थी। लगातार बिजनेसमैनों की मौतों में वोरोनोव एक नया नाम थे।

7. रविल मैगानोव
67 साल के मैगानोव लुकोइल के चेयरमैन थे। बीते गुरुवार को उनका शव मॉस्को स्थित अस्पताल के बाहर मिला। बताया गया है कि उन्होंने अस्पताल की खिड़की से छलांग लगाकर जान दी। हालांकि इस थ्योरी पर आसानी से यकीन नहीं हो रहा। वजह, रूस का मौसम काफी ज्यादा सर्द है और खिड़कियां बहुत मजबूती से बंद की गई हैं। ऐसे में किसी बीमार व्यक्ति के लिए उन्हें खोल पाना आसान नहीं।

यह मौतें संदेह के दायरे में क्यों?
क्रेमलिन विरोधी टेलीग्राम चैनल एसवीआर का दावा है कि मैगानोव की हत्या पुतिन के आदेश पर की गई है। असल में यूक्रेन और रूस के बीच जंग के बीच अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूसी तेल कंपनियों पर बैन लगा रखा है। इसके चलते रूस का तेल उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और इस क्षेत्र से जुड़े लोगों की कमाई पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। ऐसे में इस क्षेत्र के बड़े नाम सरकार के खिलाफ मुखर होने लगे थे। माना जा रहा है कि क्रेमलिन ने इन मौतों को मुंह बंद कराने के मकसद से अंजाम दिया है। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े नाम जिनमें से कई पुतिन से सीधे तौर पर जुड़े थे, उनकी मौतों के बाद भी कोई सरकारी बयान नहीं आया।

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