गाजा सिटी में इस्राइल द्वारा किए गए एक हवाई हमले में पांच पत्रकारों की मौत का दावा किया गया है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अल-अवदा अस्पताल ने कहा कि प्रेस वाहन पर हुए इस हमले में अल कुद्स टुडे टीवी के पांच पत्रकार मारे गए।
हमले के वक्त प्रेस वाहन में सो रहे थे पत्रकार
मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने बताया कि मारे गए पत्रकारों के नाम अयमान अल-जादी, फैसल अबू अल-क्यूमसान, मोहम्मद अल-लादा, इब्राहिम अल-शेख अली और फादी हसौउना हैं। हमले के वक्त ये सभी वाहन में सो रहे थे। घटनास्थल की तस्वीरों में एक प्रेस वाहन आग की लपटों में घिरा दिखा, जिस पर टीवी और प्रेस बड़े अक्षरों में लिखा था।
अल कुद्स टुडे टीवी ने इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे “पत्रकारिता धर्म और मानवीय कर्म निभाते हुए हुई मौत” करार दिया।
इस्राइली सेना का दावा और सीपीजे की रिपोर्ट
इस्राइली सेना ने बयान जारी कर कहा कि उसने गाजा के नुसेरत क्षेत्र में इस्लामिक जिहाद आतंकवादी सेल को निशाना बनाया। हालांकि, सेना ने अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया।
इस बीच, कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) ने जानकारी दी कि 7 अक्टूबर से अब तक गाजा, इस्राइल, वेस्ट बैंक और लेबनान में कम से कम 141 पत्रकार मारे जा चुके हैं। इनमें से 133 पत्रकार फलस्तीनी थे। यह समयावधि पत्रकारों के लिए अब तक की सबसे घातक मानी जा रही है।
अल जजीरा के पत्रकार की हत्या पर भी विवाद
कुछ दिन पहले गाजा में अल जजीरा के फोटो पत्रकार अहमद अल-लौह की भी एक हमले में मौत हो गई थी। अल जजीरा ने इसे “क्रूरतापूर्वक हत्या” करार दिया, जब वह एक परिवार को बचाने के प्रयास को कवर कर रहे थे।
इस्राइली सेना ने दावा किया कि अहमद अल-लौह एक “आतंकवादी” था और उसने पहले इस्लामिक जिहाद के साथ काम किया था। हालांकि, इन दावों के पक्ष में कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया गया।
पत्रकारिता के लिए बढ़ते खतरे
गाजा में लगातार हो रही हिंसा और पत्रकारों की मौत ने स्वतंत्र पत्रकारिता और मानवीय रिपोर्टिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह संघर्ष न केवल पत्रकारों की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि सत्य और निष्पक्षता की आवाज को दबाने का प्रयास भी प्रतीत होता है।

