नई दिल्ली: भारत की अध्यक्षता में 14 और 15 मई को राजधानी दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है। इस महाबैठक में पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के गहराते संकट और वैश्विक तेल एवं गैस आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर इसके प्रभाव को लेकर गहन विमर्श होने की उम्मीद है।
अध्यक्ष के रूप में भारत की भूमिका भारत इस वर्ष ब्रिक्स समूह का अध्यक्ष है और विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक के बाद सभी प्रतिनिधि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे। इस आयोजन को भारत की कूटनीतिक कुशलता की एक बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
प्रमुख देशों की भागीदारी और चीन की अनुपस्थिति
- रूस और ईरान: रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची इस बैठक में शामिल होंगे। हालांकि, ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि पश्चिम एशिया में स्थिति अचानक बिगड़ती है, तो उनके कार्यक्रम में बदलाव हो सकता है।
- चीन: चीनी विदेश मंत्री वांग यी इस बैठक में शिरकत नहीं करेंगे। चीन ने बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीजिंग दौरे के कारण वांग यी को अपने देश में रहना अनिवार्य है। उनकी जगह भारत में चीन के राजदूत शी फेइहोंग चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। चीन ने भारत की अध्यक्षता को अपना पूर्ण समर्थन देने की बात दोहराई है।
पश्चिम एशिया संकट: एक राय बनाना बड़ी चुनौती बैठक का सबसे पेचीदा मुद्दा पश्चिम एशिया के तनाव पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना है।
- ईरान की अपील: ईरान ने भारत से अपील की है कि वह अध्यक्ष के रूप में अपनी ‘स्वतंत्र भूमिका’ का निर्वहन करते हुए अमेरिका और इस्राइल के रुख को नरम करने में मदद करे।
- आपसी मतभेद: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान के बीच ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को लेकर चल रहे विवाद के कारण पिछले सत्रों में आम सहमति बनाना मुश्किल रहा है।
बैठक का मुख्य एजेंडा विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, 15 मई को एक विशेष सत्र आयोजित होगा जिसका विषय ‘ब्रिक्स एट 20: बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ रखा गया है। इसके अलावा वैश्विक शासन (Global Governance) और बहुपक्षीय संस्थानों में सुधारों पर भी विस्तृत चर्चा होगी।

