चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब दशकों से एक-दूसरे की धुर विरोधी रही पार्टियों—डीएमके और एआईएडीएमके—के बीच सरकार बनाने के लिए गुप्त समझौते की खबरें सामने आईं। हालांकि, दोनों ही दलों ने इन खबरों को पूरी तरह से ‘भ्रामक’ और ‘आधारहीन’ बताते हुए मीडिया के एक वर्ग पर तीखा हमला बोला है।
DMK का कड़ा रुख: ‘कांग्रेस का विश्वासघात और बीजेपी का दबाव’
डीएमके सांसद कलानिधि वीरासामी ने सोशल मीडिया पर इस गठबंधन की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस पर ‘विश्वासघात’ का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी, एआईएडीएमके पर नई सरकार (टीवीके) का गठन रोकने के लिए दबाव बना रही है, जो कि सीधे तौर पर जनमत का अपमान है।
वहीं, डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने हार स्वीकार करते हुए एक परिपक्व राजनीतिक रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, “विजय को सरकार बनाने दीजिए, हम छह महीने तक स्थिति का जायजा लेंगे।” स्टालिन ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी राज्य में कोई संवैधानिक संकट या दोबारा चुनाव नहीं चाहती। उन्होंने नई सरकार से अपील की कि स्कूली बच्चों के लिए ‘मुफ्त नाश्ता योजना’ और ‘महिला अधिकार योजना’ जैसी जनहितकारी नीतियों को जारी रखा जाए।
AIADMK की दोटूक: ‘किंग मेकर नहीं, किंग हैं ईपीएस’
एआईएडीएमके के भीतर से भी इस संभावित गठबंधन का पुरजोर विरोध हुआ है। पार्टी नेता सेम्मलाई ने स्पष्ट किया कि एडप्पाडी पलानीस्वामी (EPS) किसी के ‘किंग मेकर’ नहीं बनेंगे, बल्कि वह खुद एक ‘किंग’ हैं। पार्टी प्रवक्ता कोवई सत्यन और बाबू मुरुगावेल ने इन खबरों को प्रतिष्ठा गिराने वाली साजिश बताया। मुरुगावेल ने चेतावनी दी कि यदि ऐसी दो अलग विचारधारा वाली पार्टियां साथ आईं, तो अगले चुनाव में जनता दोनों को बुरी तरह हरा देगी और विजय की पार्टी टीवीके (TVK) 200 से अधिक सीटें जीत जाएगी।
मीडिया की भूमिका पर सवाल और पत्रकारों का पक्ष
इस पूरे विवाद में तमिल मीडिया की विश्वसनीयता कटघरे में है:
- द्रविड़ आंदोलन के विश्लेषक दुरई करुणा: उन्होंने कहा कि कुछ पत्रकार बिना किसी आधार के खबरें फैला रहे हैं, जिससे बचना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ जानकारी राजनीतिक दलों के अंदरूनी सूत्रों द्वारा ही मीडिया तक पहुंचाई जाती है।
- वरिष्ठ पत्रकार आरके राधाकृष्णन: दूसरी ओर, राधाकृष्णन ने अपने दावों पर कायम रहते हुए कहा कि यह कोई अफवाह नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि पर्दे के पीछे इस तरह की कोशिशें (डीएमके-एआईएडीएमके सहयोग की) निश्चित रूप से की गई थीं, जो बाद में विफल हो गईं।
डीएमके का मीडिया पर ‘एथिक्स’ का प्रहार
डीएमके प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने इसे ‘बुनियादी पत्रकारिता नैतिकता का उल्लंघन’ करार दिया। उन्होंने कहा कि असली मीडिया को यह जांचनी चाहिए कि किसके उकसावे पर यह जानकारी फैलाई गई ताकि लोगों का ध्यान मुख्य मुद्दों से भटकाया जा सके।

