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Friday, June 5, 2026

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कर्नाटक: स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब, पगड़ी और जनेऊ पहनने की अनुमति, सिद्धारमैया सरकार का नया आदेश

बंगलूरू: कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में यूनिफॉर्म को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। बुधवार को जारी एक नए सरकारी आदेश के अनुसार, अब छात्र स्कूलों और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में तय यूनिफॉर्म के साथ कुछ ‘सीमित’ पारंपरिक और धार्मिक प्रतीक पहन सकेंगे। इस फैसले के साथ ही राज्य में लंबे समय से चले आ रहे हिजाब विवाद पर सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।

पिछली सरकार का प्रतिबंध हटा

गौरतलब है कि 5 फरवरी, 2022 को तत्कालीन भाजपा सरकार ने एक आदेश जारी कर शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया था। वर्तमान कांग्रेस सरकार ने उस पुराने आदेश की समीक्षा करने के बाद नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो समावेशी शिक्षा और संवैधानिक मूल्यों पर जोर देते हैं।

किन धार्मिक प्रतीकों को मिली अनुमति?

नए आदेश के तहत, छात्र अपनी यूनिफॉर्म के साथ निम्नलिखित प्रतीक पहन सकते हैं, बशर्ते वे पहचान या अनुशासन में बाधा न डालें:

  • हिजाब/हेडस्कार्फ़
  • पगड़ी
  • जनेऊ (पवित्र धागा)
  • शिवधारा और रुद्राक्ष
  • अन्य समान पारंपरिक प्रतीक

सरकारी आदेश के मुख्य तर्क और उद्देश्य

सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि शिक्षा का उद्देश्य छात्रों का सर्वांगीण विकास और वैज्ञानिक व धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण विकसित करना है।

  • भेदभाव का अंत: किसी भी छात्र को केवल धार्मिक या पारंपरिक प्रतीक पहनने के आधार पर शिक्षा, कक्षाओं या परीक्षाओं से वंचित नहीं किया जाएगा।
  • संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता: सरकार के अनुसार, धर्मनिरपेक्षता का अर्थ व्यक्तिगत मान्यताओं का विरोध करना नहीं, बल्कि सभी का समान सम्मान और संस्थागत तटस्थता सुनिश्चित करना है।
  • अनुशासन और सुरक्षा: आदेश में कहा गया है कि इन प्रतीकों की अनुमति तभी तक है जब तक वे संस्थागत अनुशासन, सुरक्षा, शिक्षण या सार्वजनिक व्यवस्था में कोई बाधा उत्पन्न नहीं करते।
  • प्राधिकारियों को निर्देश: स्कूल विकास समितियों (SDMC) और कॉलेज प्रबंधन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी भी छात्र को किसी भी तरह के अपमान या भेदभाव का सामना न करना पड़े।

समावेशी शिक्षा पर जोर

सरकार का मानना है कि पिछले आदेश के कार्यान्वयन के दौरान विभिन्न समुदायों के छात्रों की चिंताओं को देखते हुए यह बदलाव आवश्यक था। नई नीति का उद्देश्य छात्रों के बीच “समानता, गरिमा, भाईचारा और सामाजिक सद्भाव” को बढ़ावा देना है, ताकि वे एक संवैधानिक लोकतंत्र में जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

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