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Sunday, June 28, 2026

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टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशकों का अलवर में महामंथन: पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव बोले— “बाघ संरक्षण में सरिस्का-पन्ना सफलता की मिसाल, मानव-वन्यजीव संघर्ष पर रोडमैप होगा तैयार”

अलवर/जयपुर: भारत में बाघों के संरक्षण (Tiger Conservation) और उनके प्राकृतिक आवासों को विधिक व वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी पहल शुरू की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार (28 जून 2026) को बताया कि सरकार देश भर के सभी टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशकों (Field Directors) को एक साझा विधिक व तकनीकी मंच पर साथ ला रही है। इस राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण दो दिवसीय समीक्षा बैठक का आयोजन राजस्थान के ऐतिहासिक अलवर (सरिस्का टाइगर रिजर्व के समीप) में किया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर पर बाघों के पुनर्स्थापन (Tiger Reintroduction) से जुड़े अनुभवों, विधिक चुनौतियों और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण रणनीतिक बिंदु सामने रखे।

1. “सरिस्का और पन्ना ने रची सफलता की विधिक कहानी”

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने देश के दो प्रमुख टाइगर रिजर्व की विधिक व पर्यावरणीय सफलता को विशेष रूप से रेखांकित किया:

  • 18 साल का विधिक सफर: सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों के पुनर्स्थापन (बाघों को दोबारा बसाने) के ऐतिहासिक कार्यक्रम को शुरू हुए 18 वर्ष पूरे हो चुके हैं।
  • सफलता की मिसाल: मध्य प्रदेश का पन्ना टाइगर रिजर्व और राजस्थान का सरिस्का टाइगर रिजर्व आज दुनिया भर में बाघों की आबादी को शून्य से दोबारा स्थापित करने के विधिक व वैज्ञानिक प्रयोगों की सबसे बड़ी मिसाल बने हैं।
  • कमियों की विधिक समीक्षा: मंत्री ने पूरी पारदर्शिता के साथ यह भी स्वीकार किया कि एक-दो क्षेत्रों में सरकार के ये अभिनव प्रयोग पूरी तरह सफल नहीं रहे, जिसकी विधिक व तकनीकी समीक्षा की जा रही है।

3. NTCA की समिति करेगी तकनीकी निष्कर्षों की विधिक समीक्षा
भूपेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि बाघ पुनर्स्थापन अपने आप में एक अत्यंत जटिल और वैज्ञानिक विधिक प्रक्रिया है। इस दो दिवसीय तकनीकी कार्यक्रम से जो भी निष्कर्ष और सिफारिशें (Outcomes) निकलकर सामने आएंगी, उनकी विधिक समीक्षा बाद में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA – National Tiger Conservation Authority) की उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति करेगी। इसके बाद इन्हें देश की राष्ट्रीय विधिक वन्यजीव कार्ययोजना में शामिल किया जाएगा।

4. सुंदरबन को लेकर विशेष विधिक व कूटनीतिक रुख

भारत और बांग्लादेश के बीच फैले दुनिया के सबसे बड़े मैंग्रोव वन सुंदरबन का जिक्र करते हुए पर्यावरण मंत्री ने कहा:

  • साझा यूनेस्को धरोहर: सुंदरबन को यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल का वैश्विक दर्जा विधिक रूप से प्राप्त है।
  • बाघों की मुक्त आवाजाही: यह भारत और बांग्लादेश के बीच एक साझा प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र है। यहाँ के रॉयल बंगाल टाइगर दोनों देशों की अंतरराष्ट्रीय विधिक सीमाओं की परवाह किए बिना स्वतंत्र रूप से आवाजाही करते हैं। अतः सुंदरबन के संरक्षण के लिए दोनों देशों के बीच विधिक व कूटनीतिक सहयोग को और मजबूत किया जा रहा है।

इस दो दिवसीय महामंथन से निकलने वाला विधिक रोडमैप भविष्य में भारत को बाघों की आबादी के साथ-साथ उनके सुरक्षित सह-अस्तित्व (Co-existence) के विधिक ढांचे को वैश्विक पटल पर एक नई ऊँचाई देगा।

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