नौ बच्चों की मां नाज़िया बनीं उम्मीद की किरण, स्कूल-कॉलेज बंद होने पर युवतियों ने थामा रोज़गार
काबुल के दक्षिण में स्थित एक गांव के तहख़ाने में करीब 12 महिलाएं मिलकर जैम बनाने और उसकी पैकेजिंग के काम में जुटी हैं। तालिबान शासित अफ़ग़ानिस्तान में जहां महिलाओं की सार्वजनिक गतिविधियों पर कड़े पहरे हैं, वहीं इस तरह के लघु उद्योग उन चुनिंदा अवसरों में शामिल हैं जो महिलाओं को रोजगार और हुनर सिखा रहे हैं।
इस वर्कशॉप का संचालन 47 वर्षीय उद्यमी और नौ बच्चों की मां नाज़िया कर रही हैं। इस काम में उनकी बेटी समेत कई ऐसी युवतियां शामिल हैं, जिनकी पढ़ाई तालिबान द्वारा मिडिल स्कूल और विश्वविद्यालयों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण बीच में ही छूट गई।
बाज़ार और व्यापार मेलों पर नए प्रतिबंध महिलाओं के काम करने के अवसरों को सीमित करने के साथ-साथ तालिबान प्रशासन ने नए नियम भी लागू किए हैं। इन नियमों के तहत महिलाओं को उत्पाद बाज़ार तक पहुंचाने के लिए पुरुषों की मदद लेनी अनिवार्य है। व्यापार मेलों में भी स्टॉल पर केवल पुरुष ही बैठ सकते हैं। तालिबान प्रशासन इसके पीछे महिलाओं द्वारा हिजाब नियमों के कथित उल्लंघन की दलील देता है।
दुनिया से अलग बातचीत की अपील संचालिका नाज़िया ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हुए कहा, “दुनिया को तालिबान से बातचीत का तरीका बदलना होगा, क्योंकि मौजूदा तरीका बेअसर साबित हो रहा है। अफ़ग़ान महिलाओं की ज़िंदगी में ठोस बदलाव आने चाहिए, क्योंकि अब हमारी उम्मीदें टूट रही हैं।”

