संजय पसारी, रवि टोडी समेत कई कारोबारियों के ठिकानों पर तलाशी, एक्सपोर्ट से जुड़ी भारी बकाया राशि पर नजर
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 की धारा 37 के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए मैकनेली भारत इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (एमबीईसीएल) और उससे संबंधित कंपनियों से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों के विभिन्न ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की है। केंद्रीय जांच एजेंसी का यह तलाशी अभियान संबंधित कारोबारियों के आवासीय परिसरों और कंपनी के कॉरपोरेट कार्यालयों में एक साथ संचालित किया गया। यह सख्त कदम फेमा के विभिन्न वैधानिक नियमों और प्रावधानों के कथित गंभीर उल्लंघन की शिकायतों के आधार पर उठाया गया है।
तलाशी अभियान के दायरे में संजय पसारी, राजीव पसारी, रवि टोडी और सुधीर सतनालीवाला के निजी आवासों के साथ-साथ उनसे संबद्ध व्यावसायिक संस्थानों के दफ्तर मुख्य रूप से शामिल रहे। तलाशी और जब्ती की इस विस्तृत कार्रवाई के दौरान वित्तीय जांच एजेंसी के हाथ कई संदिग्ध विदेशी मुद्रा लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य लगे हैं, जिनका गहन फॉरेंसिक व वित्तीय विश्लेषण किया जा रहा है। जांच अधिकारियों की नजरें मुख्य रूप से सीमा पार किए गए बड़े वित्तीय अंतरणों के कानूनी पहलुओं पर टिकी हैं।
ईडी के अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में विशेष रूप से निर्यात (एक्सपोर्ट) के जरिए प्राप्त होने वाली उस विशाल धनराशि का मामला सामने आया है, जो एमबीईसीएल को कभी हासिल ही नहीं हुई और वर्तमान में भी बकाया श्रेणी में दर्ज है। यह बकाया लेन-देन कंपनी के कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) के दायरे में जाने से पहले की समयसीमा से संबंधित बताया जा रहा है। जांच एजेंसी अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि क्या इन निर्यातों की एवज में मिलने वाली विदेशी मुद्रा को जानबूझकर डायवर्ट किया गया अथवा हवाला और अन्य गैर-कानूनी माध्यमों से स्थानांतरित किया गया था।

