टारगेट किलिंग और सांप्रदायिक तनाव भड़काने की थी योजना, जंगल कैंप के लिए हथियार और टेंट जुटाने का था आरोप
नई दिल्ली/बेंगलुरु: आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) से जुड़ी आतंकी साजिश के मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की विशेष अदालत ने दोषी सैयद फासिउर रहमान उर्फ सैयद फसीह उर रहमान को सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 48 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरी साजिश का मकसद देश में टारगेट किलिंग के जरिए सांप्रदायिक दंगे भड़काना और प्रतिबंधित आतंकी संगठन के एजेंडे को आगे बढ़ाना था।
बेंगलुरु में रची गई थी आतंकी साजिश एनआईए की जांच के अनुसार, मामले के मुख्य आरोपी मेहबूब पाशा ने बेंगलुरु के गुरप्पनपाल्या स्थित अपने आवास पर कई गुप्त बैठकें आयोजित की थीं। इन बैठकों में समाज में वैमनस्यता फैलाने, सांप्रदायिक तनाव पैदा करने और भारत में आईएसआईएस का एक ‘विलायत’ (प्रांत) स्थापित करने के उद्देश्य से लक्षित हत्याओं (Targeted Killings) की रूपरेखा तैयार की गई थी।
जंगल ट्रेनिंग कैंप के लिए जुटाए थे साजो-सामान जांच में यह साबित हुआ कि दोषी सैयद फासिउर रहमान न केवल इन साजिश बैठकों में सक्रिय रूप से शामिल था, बल्कि उसने ‘अल-हिंद’ समूह के सदस्यों के जंगल प्रशिक्षण शिविर (Jungle Training Camp) के लिए आवश्यक सामग्री भी मुहैया कराई थी। उस पर डेकाथलॉन स्टोर से टेंट और चाकू जैसे साजो-सामान खरीदने का आरोप साबित हुआ, जिसके आधार पर विशेष अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए सजा मुकर्रर की।

