जालंधर/पठानकोट: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के जालंधर जोनल ऑफिस ने ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (PMLA), 2002 के तहत पंजाब में एक बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने पठानकोट जिले के भटियन गांव (गोल पंचायत) में शामलात (साझा) जमीन पर रेत के अवैध खनन (माइनिंग) के मामले में 16 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह मामला न केवल वित्तीय हेरफेर बल्कि भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट होने के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
₹1.75 करोड़ कैश जब्त, बैंक खाते फ्रीज
तलाशी अभियान के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी को अवैध रेत और नदी तल सामग्री (रिवर बेड मैटेरियल) के खनन से जुड़े कई आपत्तिजनक और अहम दस्तावेज मिले हैं। ईडी ने कार्रवाई के दौरान निम्नलिखित बरामदगी की:
- बेहिसाब नकदी: छापेमारी के दौरान मौके से 1.75 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी (कैश) जब्त की गई है।
- बैंक खाते फ्रीज: जांच के दायरे में आए संदिग्धों के बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज करने का आदेश दिया गया है, जिनमें कुल 91,34,322 रुपये का बैलेंस मौजूद है।
रिटायरमेंट से एक दिन पहले जारी किया था विवादित आदेश
ईडी की यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच अमृतसर के विजिलेंस ब्यूरो पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्राथमिकी (FIR) के आधार पर शुरू हुई है। यह एफआईआर तत्कालीन एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (ADC) कुलदीप सिंह और आठ अन्य निजी व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की गई थी।
क्या है मुख्य आरोप? आरोप है कि कुलदीप सिंह को उनके रिटायरमेंट से महज चार दिन पहले राज्य सरकार के एक मंत्री की सिफारिश पर पठानकोट में एडीसी (ग्रामीण विकास) के पद पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने अपने सेवाकाल के आखिरी दिन यानी रिटायरमेंट से ठीक एक दिन पहले एक विवादित आदेश जारी कर रावी नदी के किनारे स्थित गोल पंचायत की करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी ‘शामलात जमीन’ को गैर-कानूनी तरीके से निजी व्यक्तियों के नाम ट्रांसफर कर दिया था।
स्टोन क्रशर कंपनियों और सरकारी अफसरों पर शिकंजा
ईडी ने अपनी जांच के दौरान ‘साई स्टोन क्रशर एंड स्क्रीनर’ और ‘शिव शंकर स्टोन क्रशर’ समेत उनसे जुड़ी कंपनियों और उनके मुख्य प्रबंधकीय अधिकारियों के ठिकानों को खंगाला। जांच में सामने आया है कि इन कंपनियों ने बिना किसी वैध मंजूरी, पर्यावरण क्लीयरेंस और राज्य सरकार को बिना कोई टैक्स व रॉयल्टी चुकाए बड़े पैमाने पर रावी नदी से रेत निकाली, बेची और उसका अवैध रूप से ट्रांसपोर्ट किया।
इस खेल में शामिल राज्य सरकार के कुछ अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिन्होंने जानते-बूझते हुए भी इस अवैध गतिविधि को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया, जिससे राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ।
रात के अंधेरे में बिना नंबर प्लेट के चल रहे थे ट्रक, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि सीमावर्ती इलाके में रात के समय धड़ल्ले से भारी ट्रक, टिपर और एक्सकेवेटर (जेसीबी मशीनें) अवैध खनन में लगे हुए थे। इनमें से कई वाहनों पर नंबर प्लेट तक नहीं थी, जो एक बड़े संगठित सिंडिकेट की ओर इशारा करता है।
पठानकोट और गुरदासपुर के सीमावर्ती इलाकों में हो रहे इस खनन को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (CWP-22567-2012) भी लंबित है।
- ड्रग तस्करों और आतंकियों को फायदा: कोर्ट ने अपने पिछले आदेशों में साफ तौर पर चिंता जताई थी कि रावी नदी के पार अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास इस तरह का अवैध खनन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद हानिकारक है। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि इस अवैध माइनिंग के जरिए उत्पन्न भौगोलिक बदलावों और वित्तीय नेटवर्क का फायदा सीमा पार बैठे ड्रग तस्करों और आतंकवादियों को मिल रहा है।

