नई दिल्ली/पटना: नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने मंगलवार (7 जुलाई 2026) को कंबोडिया (Cambodia) से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी (Human Trafficking) और साइबर गुलामी (Cyber Slavery) रैकेट के खिलाफ एक बड़ा देशव्यापी अभियान चलाया है। एनआईए की विशेष टीमों ने उत्तर भारत के तीन राज्यों के छह अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की।
यह कार्रवाई कंबोडिया में भारतीय युवाओं को बंधक बनाकर जबरन साइबर क्राइम कराने वाले सिंडिकेट के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए की गई है। तलाशी के दौरान एनआईए ने भारी मात्रा में स्मार्टफोन, लैपटॉप, संदिग्ध विधिक व वित्तीय दस्तावेज और कई आपत्तिजनक डिजिटल डिवाइस जब्त किए हैं।
1. तीन राज्यों के इन 6 ठिकानों पर हुई विधिक छापेमारी
एनआईए की जांच टीमों ने केस संख्या RC-10/2024/NIA/DLI के तहत गिरफ्तार हो चुके आरोपियों और फरार अपराधियों के मददगारों व करीबियों के ठिकानों को निशाना बनाया:
- बिहार (4 जिले): बिहार के चार प्रमुख जिलों — गोपालगंज, सिवान, सारण (छपरा) और पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) — में एक-एक संदिग्ध ठिकाने पर सघन तलाशी ली गई।
- उत्तर प्रदेश (1 ठिकाना): यूपी में सिंडिकेट से जुड़े एक मुख्य लिंक के परिसर पर छापेमारी की गई।
- दिल्ली (1 ठिकाना): देश की राजधानी दिल्ली में भी एक संदिग्ध ठिकाने को खंगाला गया।
2. सिंडिकेट का मास्टरमाइंड और अब तक की विधिक कार्रवाई
इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट की कड़ियों और एनआईए द्वारा अब तक की गई कानूनी कार्रवाई का विवरण नीचे दिया गया है:
कंबोडिया साइबर सिंडिकेट की विधिक स्थिति⎩⎨
⎧मुख्य मास्टरमाइंड:चार्जशीट दाखिल:नामजद आरोपी:दिल्ली में गिरफ्तारी:फरार आरोपी **आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह** इस पूरे सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहा है।एनआईए ने **मई 2026** में आनंद सिंह और उसके 4 साथियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट पेश की थी।प्रह्लाद कुमार सिंह, अभय नाथ दुबे, अभिरंजन कुमार और रोहित यादव मुख्य आरोपी हैं।**फरवरी 2026** में आरोपी अभय, अभिरंजन और रोहित को कंबोडिया से दिल्ली लौटते ही दबोचा गया था।
3. कंबोडिया के ‘टॉर्चर कैंप्स’ की खौफनाक विधा: पीड़ितों की आपबीती
एनआईए की जांच और अदालत में दर्ज पीड़ितों के विधिक बयानों से कंबोडिया में चल रहे अवैध साइबर सेंटरों के भीतर की बेहद डरावनी सच्चाई सामने आई है:
- जबरन वित्तीय धोखाधड़ी: भारतीय युवाओं को आकर्षक नौकरियों का झांसा देकर कंबोडिया ले जाया जाता था और वहां पहुंचते ही उन्हें बंधक बनाकर अवैध कंपनियों के लिए ऑनलाइन साइबर फ्रॉड करने पर मजबूर किया जाता था।
- थर्ड-डिग्री अमानवीय यातनाएं: यदि कोई युवक इस अवैध काम को करने से मना करता या विरोध दर्ज कराता, तो सिंडिकेट के गुर्गे उसे भयानक शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना देते थे।
- बिजली के झटके: पीड़ितों को डराने और वश में करने के लिए उन्हें बिजली के झटके (Electric Shocks) दिए जाते थे, जबरन कालकोठरी जैसी जगहों पर कैद रखा जाता था और कई-कई दिनों तक खाना-पानी भी नहीं दिया जाता था।
एनआईए के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह के तार कई अंतरराष्ट्रीय देशों और वित्तीय चैनलों से जुड़े हैं। आज जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच (Forensic Examination) से इस सिंडिकेट के हवाला नेटवर्क और अन्य फरार सह-आरोपियों के सटीक ठिकानों का विधिक सुराग मिलने की पूरी उम्मीद है।

