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तटीय सुरक्षा: अब मछुआरे बनेंगे सीआईएसएफ के ‘आंख और कान’, साइक्लोथॉन-2026 का कोच्चि में समापन

कोच्चि | 23 फरवरी, 2026

भारत की विशाल समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को और अभेद्य बनाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने स्थानीय मछुआरा समुदायों को ‘तट प्रहरी’ के रूप में जोड़ने की एक बड़ी पहल की है। अब समुद्र तटों और उसके आसपास रहने वाले मछुआरे सीआईएसएफ के ‘आंख और कान’ बनकर तस्करी, हथियारों की अवैध आवाजाही और संदिग्ध घुसपैठ जैसी गतिविधियों पर ‘खुफिया’ अलर्ट भेजेंगे। इस योजना के तहत बंदरगाहों और मछली पकड़ने के घाटों पर संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए, जहाँ स्थानीय निवासियों, पंचायत नेताओं और युवा मंचों ने राष्ट्रीय सुरक्षा में सक्रिय भागीदारी का संकल्प लिया।

सीआईएसएफ ‘वंदे मातरम’ तटीय साइक्लोथॉन-2026 का भव्य समापन रविवार को कोच्चि में हुआ। इस 25 दिवसीय यात्रा के दौरान सीआईएसएफ के 130 जवानों के दल ने, जिसमें 50 प्रतिशत महिला शक्ति शामिल थी, पूर्वी और पश्चिमी तटों के 6,553 किलोमीटर क्षेत्र को कवर किया। गुजरात के लखपत किले से शुरू होकर पश्चिम बंगाल के बक्खाली तक पहुंची इस यात्रा ने ‘सुरक्षित तट, समृद्ध भारत’ का संदेश प्रसारित किया। साइक्लोथॉन के माध्यम से सुरक्षा बलों ने 52 तटीय गांवों में रात बिताकर स्थानीय समुदायों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया, जिससे सुरक्षा की पहली पंक्ति के रूप में सामुदायिक सतर्कता को सुदृढ़ किया जा सके।

सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने समापन समारोह में कहा कि यह पहल जागरूकता को कार्रवाई में बदलने और नागरिकों को राष्ट्रीय सुरक्षा में भागीदार बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। भविष्य की योजना के तहत, समुद्र तट के निकट स्थित सीआईएसएफ की 47 इकाइयां इन 52 गांवों में पूरे वर्ष ओएनजीसी और बंदरगाह प्राधिकरणों के सहयोग से सीएसआर गतिविधियां चलाएंगी। इसमें स्वास्थ्य शिविर, भर्ती जागरूकता, करियर मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं की सुविधा प्रदान करना शामिल होगा, ताकि सुरक्षा बलों और स्थानीय समुदायों के बीच एक स्थायी साझेदारी बनी रहे।

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