नई दिल्ली: कथित नीट (NEET) परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में कड़े सुधारों और आंदोलनरत छात्रों की मांगों के समर्थन में अनशन पर बैठे मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात अपना अनशन समाप्त कर दिया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मेदांता अस्पताल पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की।
इस दौरान जेपी नड्डा ने सोनम वांगचुक को अपने हाथों से जूस पिलाकर उनका लगभग 25 दिनों से चला आ रहा अनशन खत्म करवाया। इस मौके पर अस्पताल में वांगचुक की पत्नी गीतांजलि एंग्मो और डॉक्टरों की टीम भी मौजूद थी।
28 जून से जंतर-मंतर पर शुरू हुआ था अनशन
- अनशन की शुरुआत: सोनम वांगचुक ने देश भर में छात्रों के हित और शिक्षा प्रणाली की मजबूती के लिए 28 जून 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बेमियादी अनशन की शुरुआत की थी।
- तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती: लगातार अनशन के कारण उनका वजन तेजी से गिरा और स्वास्थ्य चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया। डॉक्टरों की सलाह और अदालत के निर्देशों पर दिल्ली पुलिस ने उन्हें 19 जुलाई को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया।
- अस्पताल में भी जारी रखी मांगें: अस्पताल में इलाज के दौरान भी उन्होंने अपना अनशन जारी रखा था। उन्होंने मांग की थी कि सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों से वार्ता करे और उनके खिलाफ कोई दंडात्मक/दबावकारी कार्रवाई न करे।
सरकार के आश्वासन के बाद खत्म हुआ 25 दिनों का संघर्ष
24 जुलाई की देर रात केंद्रीय मंत्रियों द्वारा सरकार का सकारात्मक रुख पेश करने और मांगों पर गंभीरता से विचार करने के ठोस आश्वासन के बाद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने का फैसला किया।
सरकार की इस पहल से जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन और तनावपूर्ण माहौल के बीच शांतिपूर्ण समाधान की ओर एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

