जन विश्वास अधिनियम के तहत 6 धाराओं में बदलाव, कोर्ट-कचहरी के चक्करों से बचेंगे रेल यात्री
नई दिल्ली: ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे ने एक बड़ी राहत भरी व्यवस्था लागू की है। अब सफर के दौरान होने वाली छोटी-मोटी गलतियों—जैसे बिना वजह इमरजेंसी अलार्म चेन खींचना, बिना प्लेटफॉर्म टिकट परिसर में प्रवेश करना या अनधिकृत स्थान पर वाहन खड़ा करना—पर यात्रियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज नहीं किए जाएंगे। उत्तर रेलवे ने ‘जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम’ के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर केस दर्ज करने के बजाय सीधे ऑन-द-स्पॉट जुर्माना वसूलने की नई प्रणाली प्रभावी कर दी है।
इस कदम से आम नागरिकों को अदालती प्रक्रियाओं और कानूनी मुकदमों के लंबे झंझट से मुक्ति मिलेगी।
कोर्ट और मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी से मिली मुक्ति रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त (DSC) आशुतोष पांडेय के अनुसार, पूर्व व्यवस्था में रेलवे अधिनियम (Railway Act) के उल्लंघन पर औपचारिक आपराधिक केस दर्ज किया जाता था। इसके बाद आरोपी यात्री को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होना पड़ता था और अदालत की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।
नई व्यवस्था के तहत, जन विश्वास अधिनियम के अंतर्गत 6 धाराओं के तहत आने वाले कुल 9 तरह के उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से हटाकर शमनीय (कंपाउंडेबल) बना दिया गया है, जहां तय जुर्माना भरकर मामले का तुरंत निपटारा किया जा सकेगा।
उत्तर रेलवे में चलाया जा रहा है विशेष अभियान उत्तनई दिल्ली: ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे ने एक बड़ी राहत भरी व्यवस्था लागू की है। अब सफर के दौरान होने वाली छोटी-मोटी गलतियों—जैसे बिना वजह इमरजेंसी अलार्म चेन खींचना, बिना प्लेटफॉर्म टिकट परिसर में प्रवेश करना या अनधिकृत स्थान पर वाहन खड़ा करना—पर यात्रियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज नहीं किए जाएंगे। उत्तर रेलवे ने ‘जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम’ के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर केस दर्ज करने के बजाय सीधे ऑन-द-स्पॉट जुर्माना वसूलने की नई प्रणाली प्रभावी कर दी है।
इस कदम से आम नागरिकों को अदालती प्रक्रियाओं और कानूनी मुकदमों के लंबे झंझट से मुक्ति मिलेगी।
कोर्ट और मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी से मिली मुक्ति रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त (DSC) आशुतोष पांडेय के अनुसार, पूर्व व्यवस्था में रेलवे अधिनियम (Railway Act) के उल्लंघन पर औपचारिक आपराधिक केस दर्ज किया जाता था। इसके बाद आरोपी यात्री को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होना पड़ता था और अदालत की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।
नई व्यवस्था के तहत, जन विश्वास अधिनियम के अंतर्गत 6 धाराओं के तहत आने वाले कुल 9 तरह के उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से हटाकर शमनीय (कंपाउंडेबल) बना दिया गया है, जहां तय जुर्माना भरकर मामले का तुरंत निपटारा किया जा सकेगा।
उत्तर रेलवे में चलाया जा रहा है विशेष अभियान उत्तर रेलवे प्रशासन इन बदले हुए नियमों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए पिछले दो महीनों से छह प्रमुख धाराओं के तहत विशेष जागरूकता और प्रवर्तन अभियान चला रहा है। इससे न केवल यात्रियों को बेवजह कानूनी उलझनों से राहत मिल रही है, बल्कि रेलवे सुरक्षा बल और न्यायिक प्रणाली पर मुकदमों का अतिरिक्त बोझ भी काफी कम हो रहा है।र रेलवे प्रशासन इन बदले हुए नियमों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए पिछले दो महीनों से छह प्रमुख धाराओं के तहत विशेष जागरूकता और प्रवर्तन अभियान चला रहा है। इससे न केवल यात्रियों को बेवजह कानूनी उलझनों से राहत मिल रही है, बल्कि रेलवे सुरक्षा बल और न्यायिक प्रणाली पर मुकदमों का अतिरिक्त बोझ भी काफी कम हो रहा है।

