प्रति बोतल ₹10-20 अधिक लेने पर सरकार सख्त, पुरानी व्यवस्था को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने
चेन्नई: तमिलनाडु में सरकारी शराब की दुकानों में निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली को लेकर भारी राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (TASMAC) की दुकानों पर ग्राहकों से प्रति बोतल तय कीमत से अधिक पैसे लेने के आरोप में राज्य सरकार ने 60 से अधिक कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई चेन्नई, मदुरै, सेलम, त्रिची और कोयंबटूर समेत कई प्रमुख शहरों में की गई है, जहां बोतलों पर ₹10 से ₹20 तक अतिरिक्त वसूले जा रहे थे।
दुकानों पर क्यों लिए जा रहे थे अतिरिक्त पैसे? विधानसभा में इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करते हुए निषेध एवं आबकारी मंत्री के. विग्नेश ने बताया कि यह प्रथा वर्षों पुरानी है। शुरुआत में जब कर्मचारियों का वेतन बेहद कम था, तब प्रति बोतल ₹2 अतिरिक्त लेने की परंपरा शुरू हुई थी। धीरे-धीरे यह राशि बढ़कर ₹5 और फिर ₹10 से ₹20 तक पहुंच गई। इस अनौपचारिक वसूली का उपयोग दुकानों के बिजली बिल, दुकान के किराए और दैनिक रखरखाव जैसे खर्चों को पूरा करने के लिए किया जाने लगा। हालांकि, सरकार ने दो टूक कहा कि इस प्रकार की अतिरिक्त वसूली पूरी तरह अवैध है और इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वेतन विसंगतियां और पिछली सरकार पर आरोप मंत्री विग्नेश ने सदन में पिछली डीएमके सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती शासन में न तो कर्मचारियों के वेतन में समुचित सुधार किया गया और न ही दुकानों के रखरखाव के लिए पर्याप्त बजट आवंटित हुआ। उन्होंने बताया कि पहले कर्मचारियों का सकल मासिक वेतन करीब ₹14,000 था, जिसमें से कटौती के बाद हाथ में केवल ₹11,000 ही आते थे। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार कर्मचारियों के वेतन में सुधार कर रही है और दुकानों से भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।
डीएमके ने सरकार के तर्कों पर उठाए सवाल विपक्ष की ओर से पूर्व मंत्री के. एन. नेहरू ने सरकार के रुख पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने सवाल किया कि यदि अतिरिक्त ₹10 लेना भ्रष्टाचार है, तो इसे अब तक जारी रहने की अनुमति क्यों दी गई। नेहरू ने कहा कि यदि यह व्यवस्था पूर्ववर्ती सरकार के समय गलत थी, तो मौजूदा सरकार के कार्यकाल में भी इसे उचित नहीं ठहराया जा सकता। केवल पिछली सरकार पर दोष मढ़कर वर्तमान प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकता।
कानून मंत्री का पलटवार और टेंडर अनियमितताओं का जिक्र सदन में बहस आगे बढ़ने पर कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष सरकार की भ्रष्टाचार-रोधी जांचों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने पिछली व्यवस्था के दौरान शराब दुकानों के टेंडर में हुई कथित अनियमितताओं और नियमों को ताक पर रखकर कई खुदरा दुकानें संचालित करने के मामलों का भी उल्लेख किया।

