गैस और धूल के चक्र में हो रहा निर्माण, बृहस्पति जितना विशालकाय होने से खड़े हुए नए सवाल
वाशिंगटन: अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में खगोलविदों ने एक ऐतिहासिक और दुर्लभ उपलब्धि हासिल करते हुए अब तक ज्ञात सबसे कम उम्र के ग्रह की औपचारिक पुष्टि कर दी है। वैज्ञानिकों द्वारा ‘एलियास 2-24 बी’ नाम दिया गया यह नवजात खगोलीय पिंड 10 लाख वर्ष से भी कम पुराना है। सबसे रोमांचक बात यह है कि यह विशालकाय ग्रह अभी भी गैस और धूल की उसी प्राथमिक प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क के भीतर मौजूद है, जिसके मलबे से इसका जन्म हुआ है। इसके जरिए वैज्ञानिक किसी पुराने ग्रह का अध्ययन करने के बजाय किसी ग्रह के निर्माण के प्रारंभिक क्षणों को पहली बार अपनी आंखों से देख पा रहे हैं।
बृहस्पति के बराबर आकार और लंबी दूरी ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की उत्सुकता अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के आंकड़ों के अनुसार, एलियास 2-24 बी की खासियत केवल इसकी बेहद कम उम्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विशाल आकार और परिक्रमा पथ खगोलविदों के लिए एक बड़ी पहेली बन गया है। यह नवजात ग्रह आकार में हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति के लगभग बराबर आंका गया है। इसके अलावा, यह अपने मूल तारे से अत्यधिक दूरी पर स्थित है। यह दूरी पृथ्वी और सूर्य के बीच की कुल दूरी की तुलना में करीब 55 गुना अधिक दर्ज की गई है।
ग्रहों के निर्माण से जुड़े स्थापित सिद्धांतों पर खड़े हुए सवाल इस अनोखी खोज ने खगोल विज्ञान के वर्तमान और पारंपरिक सिद्धांतों के सामने नई वैज्ञानिक चुनौतियां पेश कर दी हैं। अब तक के वैज्ञानिक मॉडलों और स्थापित नियमों के अनुसार, किसी तारे से इतनी अत्यधिक दूरी पर और महज 10 लाख साल से कम की अल्प अवधि में बृहस्पति जैसे भीमकाय गैसीय ग्रह का पूरी तरह आकार ले लेना अत्यंत दुर्लभ और अप्रत्याशित माना जाता है। इस खोज से वैज्ञानिकों को सौरमंडलों के प्रारंभिक विकासक्रम और नए ग्रहों की संरचना को नए सिरे से समझने में मदद मिलेगी।

