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Thursday, June 18, 2026

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देश के अनियंत्रित हवाई अड्डों (Uncontrolled Airfields) पर विमान संचालन को लेकर DGCA सख्त: सुरक्षा कमियों को तुरंत दूर करने का निर्देश; बारामती लियरजेट हादसे के बाद लिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली: देश के छोटे और बिना एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) वाले अनियंत्रित हवाई अड्डों (Uncontrolled Airfields/Airstrips) पर लगातार बढ़ रहे विमान हादसों और सुरक्षा चूकों को देखते हुए विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एक बहुत बड़ा और सख्त विधिक कदम उठाया है। डीजीसीए ने देश भर के ऐसे सभी एयरस्ट्रिप, रनवे और हवाई अड्डों के सरकारी व निजी संचालकों (Operators) को एक कड़ा सुरक्षा परामर्श (Safety Advisory) जारी किया है। इसके तहत उन्हें अपने विमानन बुनियादी ढांचे (Aviation Infrastructure) की तत्काल गहन समीक्षा करने और सुरक्षा से जुड़ी सभी तकनीकी कमियों को बिना किसी देरी के दूर करने का विधिक निर्देश दिया गया है।

नियामक का स्पष्ट मानना है कि कई दूर-दराज के इलाकों में हवाई पट्टियों का रखरखाव स्थापित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है, जिससे वीआईपी (VIP) और चार्टर्ड विमानों की उड़ान सुरक्षा (Flight Safety) गंभीर रूप से खतरे में पड़ सकती है।

DGCA ने एयरस्ट्रिप संचालकों को दिए क्या कड़े विधिक निर्देश?

डीजीसीए द्वारा जारी आधिकारिक विधिक परामर्श के अनुसार, सभी अनियंत्रित एयरस्ट्रिप और हवाई अड्डों के ऑपरेटरों के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है:

  • नियमित निरीक्षण: रनवे, टैक्सीवे, एप्रन (विमान खड़े करने की जगह), विजुअल एड्स, रनवे मार्किंग और जल निकासी (Drainage) व्यवस्था का दैनिक और साप्ताहिक निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए।
  • सुरक्षा घेरा: हवाई पट्टी क्षेत्र में आवारा पशुओं या अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को रोकने के लिए बाउंड्री फेंसिंग (चारदीवारी) और प्रवेश नियंत्रण (Access Control) को बेहद मजबूत किया जाए।
  • संसाधनों का आवंटन: नियामक ने साफ किया है कि सुरक्षा को प्रभावित करने वाली किसी भी बुनियादी कमी को दूर करने के लिए संचालक पर्याप्त बजटीय संसाधन तुरंत उपलब्ध कराएं।

बारामती लियरजेट-45 विमान हादसे से मिला बड़ा सबक
इस वर्ष 28 जनवरी को महाराष्ट्र के बारामती हवाई अड्डे (जो कि एक अनियंत्रित एयरफील्ड है) के पास एक अत्याधुनिक लियरजेट-45 (Learjet-45) विमान अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हाई-प्रोफाइल हादसे की जांच कर रहे ‘विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो’ (AAIB) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में सुरक्षा को लेकर कई गंभीर विधिक सिफारिशें की थीं। रिपोर्ट में स्पष्ट रेखांकित किया गया था कि जिन अनियंत्रित हवाई अड्डों पर चार्टर्ड और वीआईपी उड़ानों का आवागमन अधिक होता है, वहां बेहतर लैंडिंग सहायता प्रणाली (Landing Aids) और सटीक मौसम संबंधी बुनियादी सुविधाएं (Meteorological Infrastructure) विकसित करना अनिवार्य होना चाहिए। इसी हादसे से सबक लेते हुए डीजीसीए ने अब यह देशव्यापी कड़ा रुख अख्तियार किया है।

क्या होते हैं ‘अनियंत्रित एयरफील्ड’ (Uncontrolled Airfields)?

विमानन नियमों के विधिक दायरे में अनियंत्रित एयरफील्ड उन हवाई अड्डों या हवाई पट्टियों को कहा जाता है, जहां नियमित रूप से कोई क्रियाशील एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर स्थापित नहीं होता है।

  1. सूचनाओं का आदान-प्रदान: ऐसे हवाई अड्डों पर टेक-ऑफ और लैंडिंग से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाएं आमतौर पर वहां संचालित होने वाले निजी उड़ान प्रशिक्षण संस्थानों (Flying Clubs) के मुख्य प्रशिक्षकों, ग्राउंड स्टाफ और स्वयं पायलटों के आपसी रेडियो संचार के माध्यम से साझा की जाती हैं।
  2. लाइसेंस की अनिवार्यता: डीजीसीए ने ऐसे सभी एयरस्ट्रिप ऑपरेटरों को, जहां से वीआईपी या चार्टर्ड विमानों का नियमित परिचालन होता है, तुरंत औपचारिक एयरोड्रोम लाइसेंस (Aerodrome License) लेने की विधिक सलाह दी है। इसके साथ ही, यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी पायलटों को मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) का शत-प्रतिशत पालन करने का निर्देश दिया गया है।

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