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Wednesday, June 17, 2026

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गुजरात पुलिस का ‘ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम’: 14 दिनों में फैक्ट्रियों से मुक्त कराए गए 84 बाल मजदूर; रोज़ाना मात्र ₹200 में हो रहा था मासूमों का सौदा

गांधीनगर/सूरत: गुजरात सरकार और राज्य पुलिस ने मासूम बच्चों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और बाल श्रम के काले साम्राज्य को उखाड़ फेंकने के लिए एक बेहद आक्रामक और देश का सबसे बड़ा कानूनी अभियान शुरू किया है। राज्य के विभिन्न औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में ‘ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम’ (Operation Childhood Freedom) नाम से एक व्यापक खोजी व बचाव अभियान चलाया जा रहा है। इस विशेष मुहिम के शुरुआती 14 दिनों के भीतर ही पुलिस के विभिन्न विंग्स ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अलग-अलग फैक्ट्रियों और कारखानों में बंधक बनाकर रखे गए 84 बाल मजदूरों को सुरक्षित मुक्त करा लिया है।

बच्चों के भविष्य और उनके बचपन से खिलवाड़ करने वाले इस संगठित नेटवर्क के खिलाफ कड़ा कानूनी शिकंजा कसते हुए पुलिस ने अब तक 26 आरोपी ठेकेदारों व नियोक्ताओं के खिलाफ 16 संगीन आपराधिक मामले दर्ज किए हैं। गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी व्यक्तिगत रूप से इस संवेदनशील और बड़े अभियान की कमान संभाल रहे हैं और इसकी प्रगति की लगातार समीक्षा कर रहे हैं।

जय अंबे टेक्सटाइल्स पर छापा: 11 घंटे काम के बदले मिलते थे महज ₹200

राज्य के औद्योगिक हब सूरत (Surat) शहर से बाल श्रम का सबसे अमानवीय और खौफनाक चेहरा सामने आया है। सीआईडी और स्थानीय पुलिस की टीम ने एक गुप्त और सटीक खुफिया इनपुट के आधार पर सूरत स्थित ‘जय अंबे टेक्सटाइल्स’ नाम की एक कपड़ा फैक्टरी पर अचानक दबिश दी। पुलिस ने फैक्टरी के भीतर बेहद संकीर्ण और अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में काम कर रहे दो नाबालिग लड़कों को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया।

प्रारंभिक विधिक जांच और बच्चों के बयानों से जो चौंकाने वाला सच सामने आया, उसने जांच अधिकारियों को भी झकझोर कर रख दिया:

  • नाममात्र का पारिश्रमिक: इन मासूम बच्चों से दिनभर की हाड़-तोड़ और खतरनाक शारीरिक मेहनत कराने के बदले रोजाना महज ₹200 की मजदूरी दी जा रही थी, जो न्यूनतम मजदूरी के कानूनी मानकों का खुला उल्लंघन है।
  • बंधक जैसी परिस्थितियां: मासूमों से सुबह 8:00 बजे से लेकर शाम 7:00 बजे तक (लगातार 11 घंटे) जबरन काम लिया जाता था। इस पूरी अवधि में उन्हें सिर्फ एक घंटे का भोजन अवकाश (Lunch Break) दिया जाता था।
  • मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न: यदि बच्चे अत्यधिक थकान या बीमारी के कारण काम करने से मना करते, तो आरोपी ठेकेदार उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने और डराने-धमकाने का सहारा लेकर जबरन काम पर झोंक देते थे।

पुलिस ने फैक्टरी मालिक और मुख्य ठेकेदार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम और किशोर न्याय (JJ) अधिनियम की विभिन्न गैर-जमानती धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।

बिहार और राजस्थान से जुड़े हैं तार; मानव तस्करी नेटवर्क पर वार
सीआईडी (क्राइम) के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) अजय चौधरी ने बताया कि तकनीकी जांच में यह साफ हुआ है कि छुड़ाए गए बच्चों में से अधिकांश बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों के गरीब और प्रवासी परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। यह सीधे तौर पर एक अंतरराज्यीय मानव तस्करी (Interstate Human Trafficking) और संगठित लेबर माफिया नेटवर्क से जुड़ा मामला है। पुलिस अब केवल स्थानीय दुकानदारों पर ही नहीं, बल्कि मुख्य सप्लायरों और दलालों की रीढ़ की हड्डी तोड़ने पर काम कर रही है।

तस्करी रोकने के लिए 4 चरणों वाली विशेष रणनीति और बड़ा लक्ष्य

गुजरात के पुलिस महानिदेशक (DGP) जी एस मलिक ने अभियान के व्यापक विजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि पुलिस का ध्यान केवल बच्चों को रेस्क्यू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका मुख्य ध्यान इन बच्चों के दीर्घकालिक पुनर्वास (Rehabilitation) और उनकी बुनियादी शिक्षा को सुनिश्चित करना है। अब तक मुक्त कराए गए बच्चों में से 67 बच्चों का सफल पुनर्वास कर उन्हें बाल गृहों और उनके परिवारों तक सुरक्षित पहुंचाया जा चुका है। इसके साथ ही, समाज को इस अपराध के प्रति सचेत करने के लिए राज्य भर में 160 जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

लेबर माफिया के इस पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करने के लिए गुजरात पुलिस चार चरणों (4 Phases) वाली रणनीतिक योजना पर काम कर रही है:

चरण (Phases)कार्यप्रणाली और रणनीतिक कदम
पहला चरणबाल श्रम के संवेदनशील हॉटस्पॉट और स्कूल छोड़ने वाले (Drop-out) बच्चों की व्यापक डिजिटल मैपिंग करना।
दूसरा चरणसंदिग्ध फैक्ट्रियों, ढाबों और वाणिज्यिक परिसरों का औचक निरीक्षण और त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन।
तीसरा चरणछुड़ाए गए बच्चों की काउंसलिंग, त्वरित सामाजिक पुनर्वास और स्थानीय स्कूलों में उनका अनिवार्य दाखिला।
चौथा चरणबच्चों की तस्करी करने वाले मास्टरमाइंड अपराधियों और संगठित नेटवर्क पर सख्त कानूनी व वित्तीय शिकंजा।

इस दूरगामी अभियान के तहत गुजरात पुलिस ने राज्य भर में 50,000 से अधिक संदिग्ध स्थानों की सघन जांच करने, ग्राउंड लेवल से 10,000 खुफिया इनपुट जुटाने और आने वाले समय में 5,000 से अधिक बाल मजदूरों को पूरी तरह मुक्‍त कराकर उनका जीवन संवारने का एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व लक्ष्य निर्धारित किया है।

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