नई दिल्ली/अमरावती: भारत के नागरिक उड्डयन और विमानन बुनियादी ढांचे (Aviation Infrastructure) ने बुधवार (1 जुलाई 2026) को एक ऐतिहासिक और युगांतकारी विधिक व तकनीकी मील का पत्थर हासिल किया है। केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश के उंडावल्ली हेलीपोर्ट (Undavalli Heliport) पर हेलीकॉप्टर संचालन के लिए देश की पहली पूरी तरह स्वदेशी ‘पॉइंट-इन-स्पेस’ (PinS – Point-in-Space) इंस्ट्रूमेंट एप्रोच प्रक्रिया को आधिकारिक व विधिक मंजूरी दे दी है।
यह अनूठी प्रणाली भारत के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में विमानन संपर्क (Aviation Connectivity) को सुरक्षित, सटीक और अत्यधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक गेम-चेंजर साबित होने वाली है।
1. क्या है ‘पिन्स’ (PinS) तकनीक और यह कैसे काम करती है?
पारंपरिक रूप से हेलीकॉप्टरों की सुरक्षित लैंडिंग के लिए जमीन पर आधारित भारी नेविगेशन उपकरणों और स्पष्ट विजिबिलिटी (दृश्यता) की आवश्यकता होती है। लेकिन नई पिन्स प्रणाली इस विधिक व तकनीकी ऊंचे ढांचे को पूरी तरह बदल देती है:
- सैटेलाइट आधारित संचालन: पिन्स (PinS) प्रक्रिया उन्नत और पूरी तरह स्वदेशी सैटेलाइट आधारित नेविगेशन तकनीक (गगन/जीपीएस) का उपयोग करती है।
- बिना ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर के लैंडिंग: इसके जरिए हेलीकॉप्टर उन दुर्गम और छोटे हेलीपोर्ट पर भी शत-प्रतिशत सुरक्षित और सटीक इंस्ट्रूमेंट एप्रोच (Instrument Approach) कर सकते हैं, जहां पारंपरिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) जैसी विधिक व भौतिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
- खराब मौसम में वरदान: यह प्रणाली विशेष रूप से घने कोहरे, भारी बारिश, खराब मौसम और पहाड़ी या घने जंगलों वाले क्षेत्रों में अत्यधिक उपयोगी है, जहां जमीनी सिग्नल पहुंचना असंभव होता है।
चारधाम यात्रा में दिखा था उन्नत विधिक तकनीक का दम
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता आधुनिक तकनीकों को अपनाकर देश में हेलीकॉप्टर संचालन को अधिक भरोसेमंद और किफायती बनाना है। मंत्रालय ने साझा किया कि इस वर्ष (2026) के ‘चारधाम हेलीकॉप्टर सेवाओं’ के पहले चरण का संचालन इसी प्रकार के उन्नत और सुरक्षित तकनीकी ढांचे के सहयोग से बिना किसी भी विधिक या भौतिक दुर्घटना (Zero Accident) के सफलतापूर्वक संपन्न किया गया है।
भारत के लिए क्यों है यह एक युगांतकारी उपलब्धि?
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, उंडावल्ली में देश की पहली पिन्स एप्रोच प्रक्रिया की विधिक मंजूरी भारत सरकार के “आत्मनिर्भर भारत” और विमानन ढांचे के आधुनिकीकरण के विजन को मजबूती देती है। यह न केवल देश के भीतर स्वदेशी सैटेलाइट आधारित नेविगेशन तकनीकों के विस्तार को प्रदर्शित करता है, बल्कि भारतीय विमानन तंत्र को वैश्विक सर्वोत्तम मानकों (Global Best Practices) के समकक्ष लाकर खड़ा करता है। भविष्य में इस तकनीक का विस्तार देश के सभी मेडिकल इमरजेंसी हेलीकॉप्टरों (HEMS) और वीवीआईपी मूवमेंट के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

