75 फीसदी हिस्सा सूखे से प्रभावित, सोयाबीन को भारी नुकसान; राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने दी जानकारी
हिंगोली: महाराष्ट्र में बारिश की भारी कमी के कारण गहराते सूखे के संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने सूखा प्रबंधन और राहत कार्यों से सीधे जुड़े कुल 11 प्रमुख विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों की सभी छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी हैं। इन सभी कर्मचारियों को दफ्तरों से निकलकर सीधे फील्ड में जाने और किसानों के खेतों में पहुंचकर फसलों को हुए वास्तविक नुकसान का तत्काल आकलन (पंचनामा) करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सोमवार को हिंगोली जिले के आरती गांव के दौरे के दौरान इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय की जानकारी दी। प्रभावित कृषि क्षेत्रों का मुआयना करने पहुंचे मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र का लगभग 75 प्रतिशत भूभाग इस समय गंभीर सूखे जैसी स्थिति से जूझ रहा है। उन्होंने बताया कि बारिश न होने के चलते खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों, विशेष रूप से सोयाबीन की तैयार फसल को सबसे व्यापक और गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिससे किसानों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के कुल 358 तालुकाओं में से 265 तालुकाओं को आधिकारिक तौर पर सूखा प्रभावित घोषित किया है। मानसूनी बेरुखी और सूखे के हालात को देखते हुए सरकार ने किसानों को फौरी राहत पहुंचाने के उद्देश्य से कई बड़े उपायों का एलान किया है। इनमें किसानों के फसल ऋणों का पुनर्गठन, भू-राजस्व में विशेष छूट और कृषि कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाले बिजली बिलों में राहत देने जैसे कदम शामिल हैं।
प्रभावित क्षेत्रों में राहत पैकेज के त्वरित और पारदर्शी वितरण के लिए नुकसान का सटीक ब्योरा तैयार किया जा रहा है। इसके लिए कृषि, राजस्व और ग्रामीण विकास समेत 11 संबंधित विभागों के अमले को चौबीसों घंटे फील्ड ड्यूटी पर तैनात किया गया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रत्येक गांव में जाकर फसल खराबे का निष्पक्ष सर्वे करें, ताकि पात्र किसानों को बिना किसी देरी के सरकारी सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराया जा सके।

